नोएडा : मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए निकला एक परिवार यह सोच भी नहीं सकता था कि रास्ते में ही मौत उसका इंतजार कर रही है. महोबा में अपनी मां की अंतिम विदाई में शामिल होने जा रहे हिसार निवासी देवेंद्र भारद्वाज के लिए यह सफर जिंदगी का आखिरी सफर बन गया. स्लीपर बस में पत्नी रेखा के साथ सफर कर रहे देवेंद्र की बस में रात करीब 11:30 बजे अचानक आग लग गई.
आग लगते ही बस में सो रहे यात्रियों की नींद चीख-पुकार से टूटी. हर कोई अपनी जान बचाने के लिए बस से बाहर निकलने की कोशिश करने लगा. रेखा किसी तरह बाहर निकल आईं, लेकिन देवेंद्र के पैर में कुछ समय पहले हुए हादसे के कारण राड लगी थी. वह तेजी से बस से बाहर नहीं निकल सके. बाहर खड़ी रेखा अपने पति को बचाने के लिए लगातार चीखती रहीं, रोती रहीं… उनकी आंखों के सामने बस आग की लपटों से घिरती चली गई, लेकिन इतनी भयंकर आग के बीच कोई अंदर जाने की हिम्मत नहीं कर सका. देखते ही देखते देवेंद्र आग की चपेट में आ गए. जिस मां की अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए वह निकले थे, उनकी चिता तक पहुंचने से पहले ही रेखा के सामने उनके पति की जिंदगी खत्म हो गई.
बता दें, दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही एक स्लीपर बस में बुधवार देर रात भीषण आग लगने से एक महिला समेत नौ लोगों की मौत हो गई. जबकि 20 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
‘बहन तू जल्दी आजा… पापा बस में फंस गए हैं’
इस हादसे ने उरई के एक परिवार को भी ऐसा दर्द दिया, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. पोस्टमार्टम हाउस पर राधिका मोबाइल में अपने पिता हरिशरण गुप्ता की तस्वीर दिखाकर लोगों से उन्हें पहचानने की गुहार लगाती रहीं. राधिका को उस वक्त तक अंदाजा नहीं था कि उनके पिता बस में बुरी तरह झुलस चुके हैं और उनका शव डीप फ्रीजर में रखा है.
राधिका ने बताया कि उनका 17 वर्षीय भाई ओम गुप्ता नोएडा में बीटेक की पढ़ाई करता है. पिता हरिशरण उसे लेने उरई से नोएडा आए थे. हादसे के बाद रात करीब ढाई बजे ओम ने रोते हुए फोन किया- ‘बहन, बस में आग लग गई और पापा अंदर फंस गए हैं… तू जल्दी कैब लेकर यहां आ जा.’ एक बेटी के लिए इससे ज्यादा डरावना फोन शायद ही कोई हो. जिस पिता को लेने के लिए परिवार नोएडा आया था, कुछ ही देर में उसी पिता की तलाश पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंच गई.
आगे बैठे यात्रियों ने बचाई जान, पीछे वालों को नहीं मिला मौका
कानपुर के रहने वाले 35 वर्षीय हासिर भी उसी बस में सवार थे. हादसे से बचने के बाद उन्होंने बताया कि नोएडा से बस में बैठने के करीब 30 से 40 किलोमीटर बाद ही बस के अंदर धुआं भरने लगा. इसके बाद बस अचानक झटके से रुक गई. हासिर के मुताबिक, आगे जाकर देखा तो चालक और क्लीनर वहां नहीं थे. इसी बीच आग तेजी से फैल गई और देखते ही देखते पूरी बस लपटों से घिर गई. यात्री अपनी जान बचाने के लिए छटपटाने लगे.
उन्होंने बताया कि आगे बैठे कई यात्रियों को बाहर निकलने का मौका मिल गया, लेकिन पीछे की सीटों पर बैठे करीब छह-सात यात्री बाहर नहीं निकल सके. बस में 40 से ज्यादा यात्री सवार बताए जा रहे हैं. हासिर ने करीब 14 यात्रियों की जान बचाने की बात भी बताई. हादसे के बाद करीब डेढ़ घंटे में पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की टीम मौके पर पहुंची, जिसके बाद राहत और बचाव का काम शुरू हो सका. यह सिर्फ एक बस हादसा नहीं था. किसी ने अपना पति खोया, किसी ने पिता, तो किसी ने अपने परिवार का सहारा. कई परिवार ऐसे हैं जिनके लिए यह रात अब जिंदगी भर एक दर्दनाक याद बनकर रह जाएगी.
