@जे0 के0…..

Sonbhadra। शिक्षक और शिष्य के बीच का रिश्ता सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं होता। कई बार एक शिक्षक अपने व्यवहार, लगन और पढ़ाने के तरीके से बच्चों के दिल में ऐसी जगह बना लेता है, जिसे विदाई का वक्त भी नहीं मिटा पाता। दुद्धी तहसील क्षेत्र के विंढमगंज स्थित कंपोजिट विद्यालय में कुछ ऐसा ही भावुक दृश्य देखने को मिला।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक राजकमल यादव के स्थानांतरण की जानकारी मिलते ही कई बच्चे भावुक हो गए। देखते ही देखते स्कूल का माहौल गमगीन हो गया और बच्चे रोने लगे। कुछ बच्चों ने शिक्षक को विद्यालय से जाने से रोकने के लिए गेट बंद कर दिया।
बच्चे गेट के पास खड़े होकर अपने शिक्षक से रुकने की अपील करते रहे। उनका कहना था कि राजकमल यादव उन्हें अच्छे तरीके से पढ़ाते हैं और उनका व्यवहार भी बच्चों के प्रति बेहद स्नेहपूर्ण है। बच्चों की आंखों में आंसू थे और वे बार-बार शिक्षक से विद्यालय छोड़कर नहीं जाने की बात कह रहे थे।
बच्चों की भावुकता देखकर शिक्षक राजकमल यादव भी अपने आंसू नहीं रोक सके। लंबे समय से बच्चों के बीच रहकर पढ़ाने वाले शिक्षक के लिए यह पल बेहद भावुक कर देने वाला रहा। विद्यालय परिसर में मौजूद लोगों के लिए भी यह दृश्य शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच बने आत्मीय रिश्ते की मिसाल बन गया।
बच्चों का कहना था कि वे अपने शिक्षक को जाने नहीं देना चाहते। वहीं, शिक्षक ने भी बच्चों को समझाने का प्रयास किया। काफी देर तक विद्यालय परिसर में भावुक माहौल बना रहा।

इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया कि शिक्षक की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं है। जब शिक्षक बच्चों के साथ आत्मीयता और जिम्मेदारी से जुड़ता है, तो उसका प्रभाव किताबों और कक्षा की सीमाओं से कहीं आगे तक पहुंचता है।
राजकमल यादव का स्थानांतरण भले ही उन्हें दूसरे विद्यालय में ले जाए, लेकिन विंढमगंज के इस विद्यालय के बच्चों के साथ बनी उनकी भावनात्मक जुड़ाव की याद लंबे समय तक बनी रहेगी।
