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अगर खेती के साथ नया कारोबार शुरू करना चाहते हैं, तो हर्बल नर्सरी और औषधीय पौधों का बिजनेस एक विकल्प हो सकता है. इस योजना के तहत किसान पौधे बेचने के साथ सरकारी सहायता का भी लाभ ले सकते हैं.
मुरादाबाद. अगर आप कमाई वाला कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो हर्बल नर्सरी और औषधीय पौधों का बिजनेस एक विकल्प हो सकता है.
आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) और राज्य सरकारों के कृषि व उद्यान विभाग औषधीय पौधों की खेती, नर्सरी और हर्बल गार्डन तैयार करने के लिए अलग-अलग योजनाओं के तहत अनुदान उपलब्ध कराते हैं. इससे किसान पौधे तैयार करके बेचने के साथ सरकारी सहायता का भी लाभ ले सकते हैं.
लोकल 18 से बातचीत में मुरादाबाद उद्यान विभाग में डीआरपी के पद पर तैनात विमल कुमार तोमर ने बताया कि हर्बल प्लांट में औषधीय पौधों से अर्क निकालकर चूर्ण और दूसरे हर्बल उत्पाद तैयार किए जाते हैं. इनकी पैकेजिंग और मार्केटिंग के जरिए कारोबार किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि यह योजना प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) के तहत भी जुड़ी हुई है, जिसमें हर्बल उत्पाद शामिल हैं.
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विमल कुमार तोमर के अनुसार, इस योजना के तहत परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है. लाभार्थी को 10 प्रतिशत मार्जिन मनी लगानी होती है और अधिकतम 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान है. उनका कहना है कि आवेदन प्रक्रिया भी काफी आसान है.
उन्होंने बताया कि आवेदन के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली का बिल, राशन कार्ड, छह महीने का बैंक स्टेटमेंट और कच्चा माल कहां से खरीदा जाएगा, उससे जुड़े दस्तावेज देने होते हैं. पहले सभी दस्तावेज हार्ड कॉपी में जमा किए जाते हैं. इसके बाद आवेदन ऑनलाइन किया जाता है, जो जिला स्तरीय समिति (DLC) से मंजूरी मिलने के बाद बैंक में भेजा जाता है और फिर लोन की प्रक्रिया पूरी होती है.
विमल कुमार तोमर के मुताबिक, मुरादाबाद जिले में इस समय तीन हर्बल प्लांट संचालित हैं. इनमें सबसे बड़ा प्लांट कांठ क्षेत्र में है, जबकि दो छोटे प्लांट शहर में संचालित हो रहे हैं. उनका कहना है कि जो लोग हर्बल प्लांट या नर्सरी शुरू करना चाहते हैं, वे उद्यान विभाग से संपर्क कर योजना की जानकारी और उपलब्ध सहायता का लाभ ले सकते हैं.

