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Why Amitabh Bachchan Quit Politics: राजीव गांधी के कहने पर अमिताभ बच्चन ने लड़ा चुनाव, जीत के बाद ऐसा क्या हुआ 3 साल में छोड़ दी सियासत?

Admin by Admin
September 24, 2026
in मनोरंजन
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Why Amitabh Bachchan Quit Politics: राजीव गांधी के कहने पर अमिताभ बच्चन ने लड़ा चुनाव, जीत के बाद ऐसा क्या हुआ 3 साल में छोड़ दी सियासत?

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Last Updated:September 24, 2026, 08:41 IST

Why Amitabh Bachchan Quit Politics: अमिताभ बच्चन का नाम आते ही जेहन में सबसे पहले फिल्मों के किरदार और उनका स्टारडम याद आता है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब उन्होंने सियासत का रुख किया था. 1984 में राजीव गांधी के कहने पर उन्होंने चुनावी मैदान में कदम रखा और बड़ी जीत दर्ज की. उस वक्त शायद ही किसी ने सोचा होगा कि पर्दे का ये सितारा राजनीति में इतना कम वक्त बिताएगा. मगर जीत के बाद कुछ ऐसा हुआ, जिसने अमिताभ के इस सफर पर सवाल खड़े कर दिए. आखिर महज तीन साल में उन्होंने राजनीति से किनारा क्यों कर लिया?

नई दिल्ली. अमिताभ बच्चन की जिंदगी में एक दौर ऐसा भी आया, जब फिल्मों का ये महानायक सीधे चुनावी मैदान में उतर गया. राजीव गांधी संग दोस्ती और भरोसे के चलते उन्होंने सियासत का दामन थामा, चुनाव लड़ा और फिर ऐसी जीत दर्ज की कि हर तरफ उन्हीं की चर्चा थी. लेकिन इस कहानी का अगला पन्ना बिल्कुल अलग था. जिस राजनीति में अमिताभ पूरे जोश के साथ आए थे, उससे महज तीन साल में ही किनारा कर लिया. आखिर जीत के बाद ऐसा क्या सामने आया, जिसने उन्हें ये रास्ता छोड़ने पर मजबूर कर दिया? फाइल फोटो

1984 में वह कांग्रेस के टिकट पर इलाहाबाद से लोकसभा चुनाव लड़े. फिल्मी दुनिया में बुलंदी पर पहुंच चुके अमिताभ ने राजनीति में भी शानदार एंट्री की और बड़े अंतर से चुनाव जीत लिया. मगर संसद तक पहुंचने के बाद उनका सियासी सफर ज्यादा लंबा नहीं चला. करीब तीन साल बाद उन्होंने राजनीति छोड़ दी. वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार और लेखिका तवलीन सिंह ने हाल ही में ‘मोजो स्टोरी’ को दिए एक इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन के 1980 के दशक में राजनीति में आने, उनके चुनाव जीतने और बाद में गांधी परिवार से संबंध बिगड़ने के चलते राजनीति छोड़ने के पीछे के कारणों का विस्तार से खुलासा किया है. फोटो साभार-@IndiaHistorypic/X

तवलीन सिंह ने बातचीत में बताया कि साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए आम चुनाव के दौरान राजीव गांधी चाहते थे कि अमिताभ बच्चन इलाहाबाद से चुनाव लड़ें. उस समय अमिताभ अपने फिल्मी करियर के शिखर पर थे. इसके बावजूद उन्होंने राजनीति में उतरने का फैसला किया और कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में आ गए. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब

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उनका मुकाबला उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता हेमवती नंदन बहुगुणा से था. यह चुनाव इसलिए भी बेहद चर्चित रहा, क्योंकि एक तरफ राजनीति के अनुभवी नेता थे और दूसरी तरफ देश के सबसे बड़े फिल्म सितारों में शामिल अमिताभ बच्चन. नतीजा आया तो अमिताभ ने सबको चौंका दिया. उन्हें 2,97,461 वोट मिले, जबकि बहुगुणा को 1,09,666 वोट हासिल हुए यानी अमिताभ ने करीब 1.88 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. फाइल फोटो

चुनाव जीतने के तुरंत बाद तवलीन सिंह ने अमिताभ बच्चन का एक इंटरव्यू लिया. उन्होंने याद करते हुए बताया कि बातचीत के दौरान अमिताभ ने कहा था, ‘मुझे इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि देश में इस तरह की भयानक गरीबी भी है.’ फाइल फोटो

तवलीन ने वो पल याद करते हुए बताया अमिताभ ने देश की गरीबी को लेकर हैरानी जताई थी. उनके मुताबिक, अमिताभ ने कहा था, ‘मुझे नहीं पता था कि इतनी गरीबी है’. तवलीन सिंह ने इस बातचीत को याद करते हुए बताया कि देश की जमीनी तस्वीर ने अमिताभ को प्रभावित किया था. फाइल फोटो

राजनीति में जोरदार शुरुआत करने वाले अमिताभ बच्चन का सियासी सफर 1987 में खत्म हो गया. उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया. हालांकि, तवलीन सिंह का मानना है कि उनका राजनीति छोड़ना सिर्फ गरीबी के एहसास तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे बोफोर्स दलाली कांड और गांधी परिवार से आई दूरी मुख्य वजह थी. तवलीन ने बताया कि बोफोर्स विवाद में बच्चन परिवार का नाम आने और गांधी परिवार के साथ पैदा हुए तनाव का इस फैसले से संबंध था. फाइल फोटो. 

1980 के दशक में स्वीडिश हथियार निर्माता कंपनी ‘एबी बोफोर्स’ (AB Bofors) द्वारा भारतीय सेना को 155 एमएम हॉवित्जर तोपों की आपूर्ति के सौदे में 64 करोड़ रुपये की रिश्वतखोरी का आरोप लगा था. इस घोटाले में तब के प्रधानमंत्री राजीव गांधी और उनके इटैलियन मित्र ओटावियो क्वात्रोची पर गंभीर आरोप लगे थे. फाइल फोटो

तवलीन सिंह ने दावा किया कि जब बोफोर्स का आरोप बच्चन परिवार पर लगाने की कोशिश की गई तो अमिताभ और उनके पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन बेहद आहत हुए.राजीव गांधी ने क्वात्रोची और अपने परिवार को बचाने के चक्कर में अमिताभ का बचाव नहीं किया और न ही उड़ती अफवाहों को शांत करने की कोशिश की, जिससे बिग बी को गहरा धक्का लगा था. बाद में 2012 में स्वीडन के पूर्व पुलिस अधिकारी और बोफोर्स जांच से जुड़े रहे स्टेन लिंडस्ट्रॉम ने कहा था कि अमिताभ का नाम भारतीय जांचकर्ताओं की ओर से मामले में जोड़ा गया था और उनके खिलाफ संलिप्तता का सबूत नहीं था. अमिताभ ने उस बयान को अपने लिए राहत देने वाला बताया था. फाइल फोटो

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First Published :

September 24, 2026, 08:41 IST

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