मथुरा: यूपी के मथुरा-वृंदावन में आने वाले समय में शहरों के विस्तार और विकास को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) ने छाता में प्रस्तावित 117 हेक्टेयर की टाउनशिप के ले-आउट को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. वहीं प्राधिकरण की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को भी बोर्ड ने हरी झंडी दिखा दी है. इसके तहत मथुरा, गोवर्धन और छाता तहसील के 93 गांव एमवीडीए के दायरे में लाने की तैयारी है.
यह फैसले शुक्रवार को वृंदावन स्थित गीता शोध संस्थान एवं रासलीला अकादमी में हुई एमवीडीए की 110वीं बोर्ड बैठक में लिए गए. मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्राधिकरण से जुड़े कई विकास प्रस्तावों पर चर्चा हुई.
दिल्ली-आगरा हाईवे के पास बनेगी नई टाउनशिप
बैठक में प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लक्ष्मी नागप्पन ने छाता टाउनशिप का प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा. दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग के पास विकसित होने वाली इस योजना के ले-आउट पर विस्तार से चर्चा के बाद सैद्धांतिक मंजूरी दी गई. मंडलायुक्त ने टाउनशिप में बड़े पार्क विकसित करने के निर्देश भी दिए हैं. योजना को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि आने वाले समय में यहां रहने और कारोबार से जुड़ी जरूरतों के लिए जरूरी सुविधाएं एक ही जगह मिल सकें.
क्या-क्या मिलेगा टाउनशिप में?
117 हेक्टेयर में विकसित होने वाली छाता आवासीय योजना में सिर्फ मकान या प्लॉट ही नहीं होंगे, बल्कि कई दूसरी सुविधाओं के लिए भी जगह रखी गई है. योजना में आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों के साथ स्कूल, कॉलेज, ग्रुप हाउसिंग, होटल, अस्पताल और सुपर मार्केट जैसी सुविधाओं का प्रावधान है.
इसके अलावा ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए भूखंड और आवास, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और दूसरी सामुदायिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी. दिल्ली-आगरा हाईवे के पास होने की वजह से इस टाउनशिप को सड़क कनेक्टिविटी का भी फायदा मिलने की उम्मीद है.
बरसाना और नंदगांव भी ज्यादा दूर नहीं
छाता टाउनशिप की एक खास बात इसकी लोकेशन भी है. यह कोकिलावन शनिधाम, बरसाना और नंदगांव जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों के आसपास के क्षेत्र में है. ऐसे में भविष्य में यहां रहने के साथ-साथ कारोबार और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों के बढ़ने की भी संभावना है.
एमवीडीए ने इस योजना को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित करने की तैयारी की है. छाता आवासीय योजना को विकसित करने की प्रक्रिया सितंबर 2024 में शुरू हुई थी. यह वृंदावन की रुक्मिणी विहार आवासीय योजना के करीब 18 साल बाद प्राधिकरण की बड़ी आवासीय योजनाओं में से एक है.
93 गांवों के लिए भी बड़ा फैसला
बोर्ड बैठक में एमवीडीए का सीमा क्षेत्र बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा गया. इसके तहत मथुरा, गोवर्धन और छाता तहसील के 93 गांवों को प्राधिकरण की सीमा में शामिल करने की योजना है. बोर्ड ने प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए इसे शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं.
शासन की मंजूरी मिलने के बाद इन गांवों में विकास की योजना एमवीडीए के नियोजन क्षेत्र के हिसाब से बनाई जा सकेगी. जमीन के इस्तेमाल और नए निर्माण से जुड़े नियम भी प्राधिकरण के दायरे के हिसाब से लागू होंगे. इससे आने वाले समय में इन इलाकों में आवासीय कॉलोनी, कारोबार और दूसरी बड़ी विकास योजनाओं को एक तय प्लान के तहत आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है.
किन इलाकों के गांव होंगे शामिल?
सीमा विस्तार के प्रस्ताव में गोवर्धन तहसील के हथिया, कमई, डाहरौली, सीह, पलसों, मडोरा, भगौसा, सकरवा, रहेड़ा, ततारपुर, सहार, देवपुरा, भरनाकलां, पाली, लोहरवारी, रीठोरा, राकौली, नाहरा, जानू, महरौली, मुड़सेरस, देवसेरस, दौलतपुर समेत कई गांव शामिल हैं. छाता तहसील के ब्रिजवारी, कमालपुर, पिसावा, मड़ोई और लौधोली को भी प्रस्तावित सीमा में शामिल किया गया है. वहीं मथुरा तहसील के भाहपुर चैनपुरा, नगला गजू, बेरुका, रामपुर, नवीपुर, नगरी, समसपुर, भुड़रसु, धाना डालचंद्र, सोन, उमरी, सनौरा, हतावली, कवायला, मलिकपुर, बाकलपुर फरह, बरोदा मशरकपुर, करनपुर, बेगमपुर, मिर्जापुर नगला, कोह, पिपरोठा, मुर्शिदपुर, जोधपुर, गोकुलपुर, विसू, भदाया, बबूरी शार्की, लाडपुर, नगला मनीराम, आमल सुल्तानपुर खादर-बांगर, बलरई बांगर-खादर, झंडीपुर खादर-बांगर, खैरट, गढ़ाया लतीफपुर खादर-बांगर, परखम, जमालपुर, धाना खेमा और मीरपुर समेत अन्य गांव प्रस्ताव में शामिल हैं.
भू-उपयोग के प्रस्तावों की फिर होगी जांच
बैठक में एमवीडीए क्षेत्र से जुड़े दूसरे विकास प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई. भू-उपयोग से जुड़े कुछ प्रस्तावों को मंडलायुक्त ने दोबारा जांचने के निर्देश दिए हैं. यानी इन प्रस्तावों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. बैठक में बोर्ड के नामित सदस्य भुवन भूषण कमल, डीएन गौतम और नवीन मित्तल के अलावा जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह, नगर आयुक्त ओजस्वी राज, प्राधिकरण सचिव आशीष कुमार सिंह, सह नियोजक स्मिता निगम, अधिशासी अभियंता प्रशांत गौतम और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे.

