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कुदरत के करिश्मे कई बार आधुनिक तकनीक को भी हैरान कर देते हैं. ऐसा ही एक दिलचस्प और पेचीदा मामला रामपुर में देखने को मिला, जहां एक जैसी शक्ल-सूरत वाली दो हमशक्ल जुड़वां बहनों को देखकर सिर्फ घरवाले और स्कूल के शिक्षक ही नहीं, बल्कि आधार कार्ड का आधुनिक बायोमेट्रिक सिस्टम भी गच्चा खा गया. सिस्टम ने एक बहन के डेटा को दूसरी का ‘डुप्लीकेट’ बताकर आवेदन ही रोक दिया. करीब ढाई महीने की लंबी जद्दोजहद और जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार दोनों बच्चियों को सरकारी रिकॉर्ड में अपनी अलग पहचान मिल सकी.
Rampur News: रामपुर में दो जुड़वां बहनों की कहानी इन दिनों चर्चा में है. तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर दोनों कक्षा 10 में पढ़ती हैं. दोनों बहनें शक्ल-सूरत में इतनी मिलती-जुलती हैं कि घरवाले और स्कूल के टीचर भी कई बार उन्हें पहचानने में कन्फ्यूज हो जाते हैं. लेकिन इस बार परेशानी इंसानों तक सीमित नहीं रही बल्कि बायोमेट्रिक सिस्टम भी दोनों की पहचान को लेकर उलझ गया. तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर के आधार बनवाने के दौरान दूसरी बच्ची का डेटा डुप्लीकेट बता दिया गया. करीब ढाई महीने तक चली प्रक्रिया के बाद आखिरकार दोनों बहनों का आधार बन सका.
सिस्टम ने डेटा को बताया डुप्लीकेट, रुक गया आवेदन
मोहल्ला खारी कुआं निवासी जुबैर इल्यास की जुड़वां बेटियां तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर हैं. दोनों के आधार बनवाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो पहले एक बच्ची का पंजीकरण हो गया. इसके बाद जब दूसरी बेटी का बायोमेट्रिक कराया गया तो सिस्टम ने उसके डेटा को पहले से मौजूद रिकॉर्ड से मिलता-जुलता पाया. आवेदन आगे नहीं बढ़ सका. परिवार ने स्थानीय स्तर पर समस्या का समाधान कराने की कोशिश की लेकिन मामला सामान्य दस्तावेजी गलती का नहीं था. बायोमेट्रिक पहचान में समानता के कारण दूसरी बच्ची का आधार अटक गया.
कलेक्ट्रेट पहुंचे परिजन, डीएम ने यूआईडीएआई से साधा संपर्क
इसके बाद दोनों बच्चियों के चाचा मसूद अहमद सिद्दीकी अपनी समस्या लेकर कलेक्ट्रेट में आयोजित जनता दर्शन में पहुंचे. जनता दर्शन में जुबैर इल्यास ने जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी को पूरी समस्या बताई. डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए यूआईडीएआई (UIDAI) के अधिकारियों से संपर्क किया. जुड़वां बच्चियों के बायोमेट्रिक डेटा में आ रही समस्या के बारे में जानकारी दी गई और इसका समाधान निकालने के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू हुई. मामला यूआईडीएआई स्तर तक पहुंचने के बाद जरूरी सत्यापन और दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी की गई. करीब ढाई महीने तक चली कवायद के बाद दूसरी बच्ची का आधार भी बन गया. अब तुबा और खिजरा दोनों की अपनी अलग पहचान है.
घर और स्कूल में अक्सर भ्रम में पड़ जाते हैं लोग
दोनों बहनों की शक्ल-सूरत इतनी मिलती है कि परिवार के लोग भी कई बार उन्हें पहचानने में गलती कर बैठते हैं. खिजरा के चाचा मसूद अहमद बताते हैं कि घर में भी कई बार दोनों को पहचानने में कन्फ्यूजन हो जाता है. खासकर जब दोनों एक जैसे कपड़ों में हों या आसपास से गुजर जाएं तो पहचानना मुश्किल हो जाता है. यह परेशानी सिर्फ घर तक ही नहीं है. खिजरा बताती हैं कि स्कूल में भी कई बार टीचर दोनों बहनों को पहचानने में कन्फ्यूज हो जाती हैं.
पसंद एक जैसी, लेकिन स्वभाव में है फर्क
खिजरा और तुबा सिर्फ शक्ल-सूरत में ही एक जैसी नहीं हैं बल्कि दोनों की पसंद भी काफी मिलती है. दोनों बहनों को पेंटिंग और ड्राइंग बनाने का बहुत शौक है. खाली समय में दोनों साथ बैठकर ड्राइंग बनाती हैं और अपनी पसंद के चित्र तैयार करती हैं. हालांकि दोनों के स्वभाव में थोड़ा अंतर है. खिजरा अपनी बहन तुबा को काफी शरारती बताती हैं. दोनों के बीच बहनों वाली नोकझोंक भी होती है और साथ में खेलने से लेकर ड्राइंग बनाने तक दोनों का खूब समय साथ गुजरता है.
ढाई महीने की मशक्कत के बाद परिवार को मिली राहत
आधार बन जाने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है. इससे पहले दूसरी बेटी के दस्तावेजी काम को लेकर परिवार को बार-बार परेशानी उठानी पड़ रही थी. अब दोनों बहनों के अलग-अलग आधार बन गए हैं. प्रशासन के मुताबिक आधार बनने के बाद दोनों बच्चियां नियमानुसार सरकारी योजनाओं और जरूरी सेवाओं का लाभ ले सकेंगी. तुबा और खिजरा के लिए यह सिर्फ एक दस्तावेज मिलने की बात नहीं है. जिस पहचान के लिए परिवार ढाई महीने तक परेशान रहा आखिरकार वह समस्या दूर हो गई. खास बात यह है कि जिन दोनों बहनों को घर और स्कूल में लोग कई बार देखकर पहचानने में कन्फ्यूज हो जाते हैं, उनकी अलग पहचान अब सरकारी रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुकी है.
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Rahul Goel is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at News18 Hindi, managing State and Local18 content operations a…
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