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फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर छाई हुई है. फिल्म की इस सफलता से रिटायर्ड कर्नल हनी बख्शी भी काफी खुश हैं. उनका मानना है कि फिल्म का इस तरह उम्मीद से परे जाकर सफल होना किसी चमत्कार से कम नहीं है. इसकी वजह यह भी है कि उन्होंने फिल्म में संत नीम करोली बाबा का रोल निभाया है. ‘हनुमान अंश’ की कहानी भी बाबा के जीवन से जुड़ी घटनाओं पर आधारित है.
हनुमान अंश को लेकर हनी बख्शी को था अंदाजा
नई दिल्ली. फिल्मी पर्दे पर संत का किरदार निभाने वाले कर्नल हनी बख्शी की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. सेना में रहकर अहम जिम्मेदारियां संभालने वाले हनी बख्शी ने ‘हनुमान अंश’ से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा और नीम करोली बाबा के रोल में नजर आए. दिलचस्प बात यह है कि जिस फिल्म को उन्होंने महज दो हफ्ते चलने की उम्मीद के साथ प्रमोट किया था, वही अब दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा का विषय बन गई है. फिल्म की इस कामयाबी को हनी बख्शी एक चमत्कार मानते हैं.
देहरादून में रहने वाले हनी बख्शी भारतीय सेना की मिलिट्री इंटेलिजेंस में अधिकारी रह चुके हैं. सेना में रहते हुए वह एक खास यूनिट की कमान संभाल चुके हैं. बाद में उन्हें जनरल कोर्ट मार्शल की कार्रवाई का भी सामना करना पड़ा था. अब वह एक्टिंग के साथ-साथ वेब सीरीज के लिए कहानियां और स्क्रिप्ट लिखने में समय दे रहे हैं.
कुछ मिनट के रोल से मिली बड़ी पहचान
फिल्म में हनी बख्शी का भले ही बहुत बड़ा नहीं है. लेकिन अपने कुछ मिनटों के रोल में भी उन्होंने लोगों का ऐसा दिल जीता कि हर तरफ उनके चर्चे होने लगे. लेकिन उनका कहना है कि ‘हनुमान अंश’ की कहानी का फोकस नीम करोली बाबा के बचपन और उनकी जवानी के दौर पर है. यह फिल्म तीन हिस्सों में बनने वाली सीरीज के पहले भाग की तरह है. हनी बख्शी के मुताबिक, उन्हें बताया गया है कि दूसरे पार्ट में उनके किरदार को ज्यादा स्क्रीन स्पेस मिलेगा.
नीम करोली बाबा के रूप में ऐसा है रोल
हनी बख्शी ने अपने रोल के बारे में बताया कि ‘हनुमान अंश’ की शुरुआत उस समय से होती है, जब नीम करोली बाबा को उनकी शक्तियां मिल चुकी थी. इसी दौरान उनकी मुलाकात डॉ. भोंसले से होती है. डॉ. भोंसले पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का इलाज करने वाले डॉक्टर थे. फिल्म में हनी बख्शी और डॉ. भोंसले के बीच एक बातचीत का सीन भी है. इस दौरान बाबा उनसे कहते हैं कि वह नेहरू को बचा नहीं पाए. हनी बख्शी ने बताया कि उनका यह हिस्सा करीब दो मिनट का है.लेकिन छोटा सा रोल भी काफी अहम साबित हुआ.
बता दें कि हनी बख्शी ने अपनी बातचीत में कहा कि उन्हें शुरुआत में बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि फिल्म इस कदर सफलता हासिल करेगी. लोगों के बीच उसकी इतनी चर्चा होगी. फिल्म को मिली इस अपार सफलता को वह किसी चमत्कार जैसा मानते हैं. उन्होंने तो यहां तक सोच लिया था कि फिल्म ज्यादा से ज्यादा दो हफ्ते तक सिनेमाघरों में रहेगी.बात अगर हनी बख्शी की करें तो साल 1988 में देहरादून की इंडियन मिलिट्री अकादमी में कैडेट थे, उसी दौरान उन्हें मिलिट्री इंटेलिजेंस में कमीशन मिला था. 2007 से 2010 तक उन्होंने कोलकाता में मिलिट्री इंटेलिजेंस की एक यूनिट की कमान संभाली. इसके बाद तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने उन्हें टेक्निकल सपोर्ट डिवीजन यानी TSD की जिम्मेदारी दी. यह सेना की एक विशेष यूनिट थी.
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न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…
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