उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले पोस्टर वॉर का एक नया दौर सामने आया है. इसमें यूपी के अलग-अलग क्षेत्रों के अलग-अलग लोगों के नामों के पोस्टर लग रहे हैं. इसी मामले में पश्चिमी यूपी यानी जाटलैंड में भी ऐसे ही पोस्टर लगाए गए हैं. जो इस इलाके के ऐसे लोग हैं जो अलग-अलग दौर में अपराध, बाहुबली राजनीति और कानून-व्यवस्था की बहस से जुड़े रहे हैं. पोस्टर पर ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ लिखा गया है और याकूब कुरैशी, अनिल दुजाना, डीपी यादव, संजीव जीवा और मुकीम काला समेत कई नाम दर्ज हैं. पोस्टर के जरिए अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के पुराने शासनकाल पर निशाना साधने की कोशिश की गई है. तो समझते हैं इसकी पूरी कहानी.
जाटलैंड में पुराने नाम क्यों लौटे?
पश्चिमी यूपी की राजनीति में कानून-व्यवस्था और अपराध का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है. इसी पृष्ठभूमि में पोस्टर में पुराने चर्चित नामों को एक साथ रखकर एक राजनीतिक संदेश देने की कोशिश दिखाई दे रही है. पोस्टर में पश्चिमी यूपी के लिए आजम खान, याकूब कुरैशी, अनिल दुजाना, डीपी यादव, संजीव जीवा और मुकीम काला के नाम शामिल किए गए हैं. पोस्टर इन नामों को समाजवादी पार्टी के दौर से जोड़ते हुए राजनीतिक आरोप लगाता है. हालांकि, यह पोस्टर किस व्यक्ति या संगठन ने लगवाया, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है.
मुकीम काला और कैराना का मुद्दा
पश्चिमी यूपी के पोस्टर में मुकीम काला का नाम खास तौर पर ध्यान खींचता है. पोस्टर में मुकीम काला गिरोह को कैराना पलायन से जोड़ा गया है. कैराना का पलायन पश्चिमी यूपी की राजनीति में पहले भी कानून-व्यवस्था और अपराध की बहस का हिस्सा रहा है.
यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि कैराना पलायन से मुकीम काला गिरोह के संबंध का दावा पोस्टर में किया गया है. इसे पोस्टर का राजनीतिक आरोप मानकर ही देखा जाना चाहिए. रिपोर्टों में भी इस दावे को पोस्टर के संदर्भ में ही दर्ज किया गया है.
यानी पुराने कैराना नैरेटिव को फिर से सामने लाकर पश्चिमी यूपी में कानून-व्यवस्था की बहस को चुनावी चर्चा से जोड़ने की कोशिश नजर आती है.
अनिल दुजाना का नाम क्यों?
अनिल दुजाना पश्चिमी यूपी और एनसीआर में अपराध की दुनिया से जुड़े चर्चित नामों में रहा है. पोस्टर में उसका नाम शामिल करके पश्चिमी यूपी के पुराने अपराध इतिहास की याद दिलाई गई है.
यहां भी पोस्टर का संदेश किसी एक घटना तक सीमित नहीं है. कई पुराने चर्चित नामों को एक साथ रखकर एक ऐसा राजनीतिक फ्रेम बनाया गया है, जिसमें पश्चिमी यूपी के अपराध और बाहुबली राजनीति की पुरानी तस्वीर सामने आती है. यही इस पोस्टर की सबसे अहम बात है.
संजीव जीवा का जिक्र भी खास
पश्चिमी यूपी की सूची में संजीव जीवा का नाम भी है. पोस्टर में 1997 में पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या का जिक्र किया गया है. यह मामला जीवा के नाम से जुड़ी आपराधिक घटनाओं की चर्चा में लंबे समय से आता रहा है.
पोस्टर बनाने वालों ने इसी पुराने मामले को सामने रखकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि पश्चिमी यूपी में अपराध और राजनीति से जुड़े पुराने अध्यायों को फिर चुनावी बहस में लाया जाए.
याकूब कुरैशी और डीपी यादव भी सूची में
पश्चिमी यूपी के पोस्टर में याकूब कुरैशी और डीपी यादव के नाम भी शामिल हैं. दोनों नामों को एक ही सूची में रखकर पोस्टर पश्चिमी यूपी की पुरानी राजनीतिक और आपराधिक बहस को एक साथ जोड़ता है.
आजम खान का नाम भी शामिल
पश्चिमी यूपी की सूची में आजम खान का नाम भी दर्ज है. पोस्टर के दूसरे हिस्सों में आजम, अतीक और मुख्तार की तस्वीरों के साथ ‘यही चलाते थे सरकार’ जैसे राजनीतिक आरोप लगाए गए हैं.
इसका सीधा निशाना समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव का राजनीतिक दौर है. रिपोर्टों के मुताबिक पोस्टरों पर ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ जैसी लाइन भी लिखी गई है. यह पोस्टर का राजनीतिक संदेश है, तथ्यात्मक निष्कर्ष नहीं.
2027 से पहले क्या है नैरेटिव?
पश्चिमी यूपी में इन नामों को एक साथ रखने का सबसे बड़ा संदेश यही दिखाई देता है कि चुनावी बहस में कानून-व्यवस्था और पुराने अपराध के मामलों को फिर जगह दी जाए.
मुकीम काला के जरिए कैराना, दुजाना के जरिए पश्चिमी यूपी-एनसीआर का अपराध इतिहास और संजीव जीवा के जरिए पुराने राजनीतिक हत्याकांड की चर्चा को एक ही फ्रेम में लाया गया है. इसके साथ याकूब कुरैशी, डीपी यादव और आजम खान के नाम जोड़कर पोस्टर ने पश्चिमी यूपी की अलग-अलग राजनीतिक और आपराधिक बहसों को एक साथ पेश किया है.
