अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर इन दिनों फीफा को धमकाने के आरोप लगे हैं. अमेरिकी स्टार स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को वर्ल्ड कप के एक मैच के दौरान रेड कार्ड मिला था. लेकिन बाद में इस कार्ड को वापस ले लिया गया. फुटबॉल में जिस खिलाड़ी को रेड कार्ड मिलता है उसपर एक मैच का बैन लगा दिया जाता है. लेकिन इस कार्ड को वापस लेने की वजह ट्रंप को फीफा को धमकी बताई जा रही है. हालांकि विवाद अभी भी जारी है लेकिन एक वर्ल्ड कप ऐसा भी था जिसमें तानाशाह ने टीम को ड्रेसिंग रूम में आकर धमकी दे दी थी.
अर्जेंटीन-पेरू के मैच पर हुआ था विवाद
तारीख थी 21 जून 1978. वर्ल्ड कप की मेजबानी कर रहा अर्जेंटीना देश बाहर होने की कगार पर खड़ा था. इटली, फ्रांस और हंगरी जैसी मजबूत टीमों को हरा चुका था, लेकिन दूसरे ग्रुप स्टेज में अपने सबसे बड़े दुश्मन ब्राजील से पिछड़ रहा था. उस जमाने में आज की तरह नॉकआउट मैच नहीं होते थे और न ही जीत के 3 पॉइंट मिलते थे. नियम सीधा था जो टीम अपने ग्रुप में टॉप करेगी, वही सीधे फाइनल में नीदरलैंड्स से भिड़ेगी.
मैच शुरू होने से पहले ब्राजील 5 पॉइंट्स और +5 गोल डिफरेंस के साथ पहले नंबर पर था. वहीं अर्जेंटीना 3 पॉइंट्स और +2 गोल डिफरेंस के साथ दूसरे नंबर पर था. फाइनल का टिकट पाने के लिए अर्जेंटीना को हर हाल में अपना आखिरी मैच कम से कम 4 गोल के अंतर से जीतना था.
आम तौर पर गड़बड़ी से बचने के लिए आखिरी दौर के मैच एक ही समय पर होते हैं, लेकिन फीफा ने एक अजीब फैसला लिया. उन्हें डर था कि अगर मैच एक साथ हुए, तो लोग स्टेडियम आने के बजाय घर पर टीवी देखेंगे. इसलिए अर्जेंटीना का मैच ब्राजील के मैच के बाद रखा गया, जिससे अर्जेंटीना को साफ पता चल गया कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए क्या करना है.
मैदान पर चमत्कार या फिक्सिंग का खेल?
मैच में वही हुआ जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. अर्जेंटीना ने पेरू को 6-0 से हराकर ब्राजील को गोल डिफरेंस में पीछे छोड़ दिया. फाइनल का टिकट कटा लिया. इसके बाद उन्होंने फाइनल में नीदरलैंड्स को 3-1 से हराकर अपना पहला वर्ल्ड कप भी जीत लिया.
लेकिन इस जीत का जश्न हमेशा के लिए विवादों के घेरे में आ गया. दावों के मुताबिक मैच शुरू होने से ठीक पहले अर्जेंटीना के तानाशाह जॉर्ज राफेल विडेला पेरू के ड्रेसिंग रूम में घुस गए. उनके साथ अमेरिकी विदेश मंत्री हेनरी किसिंजर भी थे. वहां उन्होंने पेरू के तानाशाह का एक मैसेज पढ़कर सुनाया. इसमें दोनों देशों की दोस्ती की दुहाई दी गई थी. खिलाड़ियों के लिए यह एक छिपी हुई धमकी थी कि वे मैच हार जाएं.
अनाज के बोरे और करोड़ों के लोन बना गवाह
मैच खत्म होने के ठीक 10 दिन बाद अर्जेंटीना सरकार ने पेरू को एक ऐसा लोन दिया. वो भी नॉन-रिफंडेबल क्रेडिट के साथ यानी इसे कभी चुकाना ही नहीं था. यही नहीं, मैच से ठीक पहले अर्जेंटीना ने पेरू को मुफ्त में 35 हजार टन अनाज भेजा था, जैसा अक्सर किसी बड़ी आपदा के समय ही किया जाता है.
हालांकि, अर्जेंटीना की सरकार और उसके खिलाड़ी हमेशा इन आरोपों को खारिज करते रहे. उनका तो यह भी कहना था कि ब्राजील ने पेरू के खिलाड़ियों को अर्जेंटीना को हराने के लिए रिश्वत देने की कोशिश की थी. पेरू के कुछ खिलाड़ियों ने कहा कि वे थकान और आपसी मतभेदों की वजह से हारे.
बड़े खिलाड़ियों के दावे
लेकिन दूसरी तरफ जुआन कार्लोस ओब्लिटास, जोस वेलास्केज और जर्मन लेगुआ जैसे स्टार खिलाड़ियों ने सालों बाद खुलकर माना कि उन्हें अर्जेंटीना सरकार की तरफ से रिश्वत और धमकियां मिली थीं. वेलास्केज़ ने तो अपने कप्तान हेक्टर चुम्पिटाज़ समेत उन खिलाड़ियों के नाम भी उजागर कर दिए जिन्होंने पैसे लिए थे. हालांकि उन खिलाड़ियों ने इस बात से साफ इनकार किया.






