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पहले वकालत, फिर बिजनेस और उसके बाद फिल्मी दुनिया में एंट्री, ‘शोले’ ने बना दिया बॉलीवुड का सरताज

Admin by Admin
September 14, 2026
in मनोरंजन
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पहले वकालत, फिर बिजनेस और उसके बाद फिल्मी दुनिया में एंट्री, ‘शोले’ ने बना दिया बॉलीवुड का सरताज


Last Updated:September 14, 2026, 04:01 IST

हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्हें किसी एक फिल्म या दौर तक सीमित नहीं किया जा सकता. जी.पी. सिप्पी भी उन्हीं दिग्गज फिल्ममेकर में शामिल थे. उन्होंने अपने लंबे करियर में कई फिल्मों का निर्माण किया और ऐसी फिल्म बनाई, जिसे आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है. जी हां, बात हो रही है ‘शोले’ की.

ख़बरें फटाफट

पहले वकालत, फिर बिजनेस और उसके बाद फिल्मी दुनिया में एंट्रीZoom

1975 में रच दिया था इतिहास

नई दिल्ली. जी.पी. सिप्पी का असली नाम गोपालदास परमानंद सिपाहिमलानी था. यानी जिस ‘सिप्पी’ नाम से वह बॉलीवुड में मशहूर हुए, वह उनका असली सरनेम नहीं था. बताया जाता है कि ‘सिपाहिमलानी’ नाम लोगों के लिए बोलना थोड़ा मुश्किल था, इसलिए इसे छोटा करके ‘सिप्पी’ कहा जाने लगा. धीरे-धीरे यही नाम उनकी और उनके परिवार की पहचान बन गया.

जी.पी. सिप्पी का जन्म 14 सितंबर 1914 को हैदराबाद, सिंध में हुआ था, जो उस समय ब्रिटिश इंडिया का हिस्सा था और अब पाकिस्तान में है. वह एक संपन्न कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते थे. उनके परिवार का कारोबार अंग्रेजों और दूसरे यूरोपीय लोगों के साथ भी था. हालांकि, जी.पी. सिप्पी की पहचान सिर्फ ‘शोले’ तक सीमित नहीं थी. उनकी जिंदगी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही. कारोबार, कानून की पढ़ाई, बंटवारे का दर्द और फिर मुंबई आकर दोबारा अपनी पहचान बनाना, उनके जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए.

पहले वकील बने, फिर फिल्मों में आए

फिल्मों में कदम रखने से पहले जी.पी. सिप्पी की जिंदगी का सिनेमा से कोई खास लेना-देना नहीं था. उन्होंने कानून की पढ़ाई की और वकील के तौर पर काम किया. इसके अलावा वह कारोबार से भी जुड़े रहे और उनकी जिंदगी का एक हिस्सा कराची में गुजरा. लेकिन 1947 में देश के बंटवारे ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी. सिप्पी परिवार को सिंध छोड़कर भारत आना पड़ा. मुंबई आने के बाद उन्होंने फिर से अपनी जिंदगी शुरू की. उन्होंने प्रॉपर्टी और कंस्ट्रक्शन के कारोबार में हाथ आजमाया और कोलाबा और चर्चगेट जैसे इलाकों में इमारतों के निर्माण और बिक्री से जुड़े काम किए.

ऐसे हुई फिल्मों में एंट्री

मुंबई में काम करते हुए उनकी मुलाकात फिल्मी दुनिया से हुई. मरीन लाइंस इलाके में गोविंद महल के निर्माण से जुड़े एक प्रोजेक्ट के दौरान उन्हें एक फिल्म बनाने का ख्याल आया. प्रोजेक्ट से जुड़े काम के जरिए मिले पैसों का इस्तेमाल उन्होंने फिल्म निर्माण में किया. इसके बाद साल 1951 में जी.पी. सिप्पी ने फिल्म ‘सजा’ से बतौर प्रोड्यूसर हिंदी सिनेमा में कदम रखा. फिल्म में देव आनंद और निम्मी मुख्य भूमिकाओं में थे. फिल्म कोई बहुत बड़ी हिट तो नहीं रही, लेकिन यहीं से जी.पी. सिप्पी का फिल्मी सफर शुरू हो गया.

कई फिल्मों का किया निर्माण

इसके बाद जी.पी. सिप्पी ने कई फिल्मों का निर्माण किया और कुछ फिल्मों का निर्देशन भी किया. 1950 के दशक में उन्होंने ‘शाहेंशाह’, ‘भाई-बहन’, ’12 ओ’क्लॉक’ और ‘मरीन ड्राइव’ जैसी फिल्मों के साथ काम किया. वह ‘मरीन ड्राइव’, ‘अदल-ए-जहांगीर’, ‘श्रीमती 420’, ‘लाइट हाउस’ और ‘मिस्टर इंडिया’ जैसी फिल्मों के निर्देशन से भी जुड़े रहे. हालांकि बाद के दौर में उनका ज्यादा ध्यान फिल्म निर्माण पर रहा.

बता दें कि जी.पी. सिप्पी की फिल्मों का दायरा समय के साथ बढ़ता गया. उन्होंने ‘ब्रह्मचारी’, ‘अंदाज’ और ‘सीता और गीता’ जैसी चर्चित फिल्मों का निर्माण किया. साल 1972 में रिलीज हुई ‘सीता और गीता’ ने उनकी पहचान को और मजबूत कर दिया.लेकिन उनके करियर की सबसे बड़ी फिल्म अभी आना बाकी थी. साल 1975 में रमेश सिप्पी के निर्देशन में ‘शोले’ रिलीज हुई. इस फिल्म का निर्माण जी.पी. सिप्पी और उनके बेटे रमेश सिप्पी ने मिलकर किया था. रिलीज के बाद फिल्म ने ऐसा इतिहास रचा कि जी.पी. सिप्पी का नाम हमेशा के लिए भारतीय सिनेमा के इतिहास में दर्ज हो गया.

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Munish KumarSenior sub editor

न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…

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Location :

New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

September 14, 2026, 04:01 IST





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