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यूपी के फिरोजाबाद में पिछले दो दशकों से सूखी और उपेक्षित पड़ी 108 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक सिरसा नदी को मनरेगा विभाग और स्थानीय मजदूरों के साझा प्रयास से नया जीवन मिल गया है. जिले के छह प्रमुख ब्लॉकों से गुजरने वाली इस सदियों पुरानी नदी की व्यापक साफ-सफाई और जीर्णोद्धार के बाद अब इसमें स्वच्छ जल बहने लगा है. इस शानदार पहल से ग्रामीणों को रोजगार मिला और क्षेत्रीय किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए एक मजबूत, स्थायी और प्राकृतिक साधन उपलब्ध हो गया.
Firozabad Sirsa River News: यूपी के फिरोजाबाद में कई सालों से निरंतर बह रही एक नदी अपने अस्तित्व को खो रही थी. कई ब्लॉकों से होकर गुजरने वाली नदी किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी, लेकिन अनदेखी के कारण इस नदी पर गहरा संकट छाया हुआ था. इसी को देखते हुए मनरेगा विभाग ने इस नदी को दोबारा से जीवंत करने के लिए प्रयास शुरू किया. धीरे-धीरे नदी को लेकर काम शुरू किया गया. नदी की साफ-सफाई से लेकर उसमें बहने वाले पानी को लेकर भी काम किया गया. जिन गांवों से होकर नदी गुजरती थी, वहां गांव के मनरेगा मजदूरों द्वारा कार्य कराया गया. जिससे उनको मजदूरी भी मिली और नदी को दोबारा से जीवित होने का अवसर मिला. अब यह नदी किसानों की खेती में भी मदद कर रही है.
एटा से इटावा तक 108 किमी का सफर
फिरोजाबाद मनरेगा विभाग की अधिकारी तुलिका श्रीवास्तव ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए कहा कि फिरोजाबाद में बहने वाली सिरसा नदी सदियों पुरानी नदी है. सिरसा नदी एटा से निकलती है और लगभग 108 किमी का सफर तय करती हुई इटावा की यमुना नदी में मिलती है. यह नदी दो दशकों से सूखी पड़ी थी. कभी यह नदी किसानों की खेती के लिए मददगार थी, लेकिन धीरे-धीरे इसका अस्तित्व खत्म होने लगा. फिर मनरेगा ने इस नदी के जीर्णोद्धार के लिए प्रयास शुरू किया. यह नदी जिले के 6 ब्लॉकों नारखी, टूंडला, हाथवंत, शिकोहाबाद, अरांव और मदनपुर ब्लॉक से होकर गुजरती है.
लाखों के बजट और स्थानीय श्रम से हुआ कायाकल्प
सभी ब्लॉक स्तर पर सिरसा नदी की साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए गए. इसके साथ ही मनरेगा विभाग ने मजदूरों के जरिए इसकी साफ-सफाई का कार्य कराना शुरू किया. जिन गांवों से होकर यह नदी गुजर रही थी, उसी गांव के मजदूरों ने मनरेगा के जरिए काम किया. इतना ही नहीं, इस सिरसा नदी को सुंदर बनाने के लिए मनरेगा ने लाखों रुपए का बजट खर्च किया. नदी के किनारे पर पेड़ भी लगाए. लगभग 20 साल से सूखी पड़ी सिरसा नदी फिर से जीवित होकर निरंतर बहने लगी.
किसानों को मिला सिंचाई का स्थायी साधन
इस नदी के जीवंत होने पर इसमें साफ पानी बहने लगा. 6 ब्लॉकों से होकर गुजरने वाली नदी किसानों के सिंचाई का अच्छा साधन बन गई. इस नदी से किसानों की फसलों को पानी मिलना आसान हो गया. नदी किनारे खेती करने वाले किसान भी इसकी देखरेख कर रहे हैं. पहले किसानों को सिंचाई के लिए ट्यूबवेल आदि का सहारा लेना पड़ता था. इस नदी का पानी साफ नहीं था, जिससे सिंचाई करना संभव नहीं हो पाता था. लेकिन मनरेगा विभाग और गांव के मजदूरों ने मिलकर इस नदी को पुनर्जन्म दे दिया. अब यह नदी फिर से शांति से बहती हुई दिखाई दे रही है.
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Rahul Goel is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at News18 Hindi, managing State and Local18 content operations a…
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