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फिल्म ‘हनुमान अंश’ का भक्ति गीत ‘पार्वती’ वायरल हो रहा है. गाने में बुंदेली अंदाज का अनूठा मेल है. गीत में माता पार्वती के भगवान शिव से शादी के अटूट संकल्प को बयां किया गया है. गाने के बोल ‘जब जिद पे आ गई पार्वती’ खासतौर पर ध्यान खींच रहा है. आइए, आपको गीत का खूबसूरत मतलब समझाते हैं.
लोक-भक्ति गीत के बोल काफी ध्यान खींच रहे हैं. (फोटो साभार: YouTube@Videograb)
नई दिल्ली: फिल्म ‘हनुमान अंश’ की कहानी दर्शकों के दिल को छू रही है. फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस से डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा का कारोबार कर लिया है. फिल्म से जुड़े तमाम कलाकारों की किस्मत भी चमक गई है. ‘हनुमान अंश’ के गाने भी खूब पसंद आ रहे हैं. मगर फिल्म के गाने ‘पार्वती’ में कुछ बहुत ही अनोखी और हटकर बात है. लोग इसे समझना चाहते हैं. गाने की खास बात यह है कि यह भगवान शिव को किसी ऊंचे दिव्य स्थान पर रखने के बजाय एक व्यावहारिक सवाल उठाता है. देवी पार्वती ऐसे तपस्वी से शादी करने पर क्यों अड़ी हैं, जिन्हें सांसारिक चीजों में कोई दिलचस्पी नहीं है, जो गले में सांप लपेटे रहते हैं और गृहस्थ जीवन के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं लगते?
लोक-भक्ति गीत के बोल काफी ध्यान खींच रहे हैं. जैसे गाने की यह पंक्ति- ‘जब जिद पे आ गई पार्वती’ पर लोग चिंतन-मनन कर रहे हैं. इसके वीडियो और ऑडियो वर्शन को लाखों बार देखा गया है. इंस्टाग्राम रील्स व अन्य शॉर्ट-फॉर्म वीडियो के जरिए भी इसे काफी ऑडियंस मिले हैं. हालांकि, गाने में पार्वती के शिव से शादी करने के अटूट संकल्प की चर्चित कहानी है. इसे बुंदेली अंदाज, लोक-हास्य और सप्तऋषियों की उन्हें मनाने की बेकार कोशिशों के जरिए बयां किया गया है.
क्या है गाने के पीछे की कहानी?
गाना ‘पार्वती’ भगवान शिव से शादी करने के पार्वती के संकल्प से जुड़ी है. शिव भगवान को अपना जीवनसाथी मानने के बाद पार्वती कठोर तपस्या करती हैं. सप्तऋषि उनके पास आते हैं और उन्हें अपने फैसले से पीछे हटाने के लिए विवश करने की कोशिश करते हैं. यह प्रसंग ‘रामचरितमानस’ के बालकांड में शिव-पार्वती की कथा से भी जुड़ा हुआ है. पार्वती इसी बातचीत को अपनी बात का मुख्य आधार बनाती हैं. सप्तर्षि असल में शिव की सभी असामान्य बातों की ओर इशारा करते हुए पार्वती से अपने फैसले पर फिर से सोचने के लिए कहते हैं.
बॉलीवुड भजन नहीं लोक-कथा जैसा है गीत
साधु एस तिवारी ने ‘पार्वती’ गाने के मूल रचनाकार हैं. उन्होंने ही इसे लिखा, कंपोज किया और गाया है, जबकि संगीत प्रोडक्शन का श्रेय समीरन दास को भी जाता है. इसके लोक-संगीत पर आधारित अरेंजमेंट में तबला, परकशन और स्ट्रोक्स जैसे वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल हुआ है, जिसमें तापस रॉय और अक्षय जाधव जैसे संगीतकार शामिल हैं. सिनेमाई भक्ति संगीत में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले भव्य ऑर्केस्ट्रा वाले अंदाज के बजाय ‘पार्वती’ गाने की कहानी कहने का तरीका जमीन से जुड़ा हुआ है. साधु एस तिवारी के गाने का अंदाज और बुंदेली शब्दावली इसे पारंपरिक बॉलीवुड भजन के बजाय लोक-कथा जैसा बनाती है.
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अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…
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