@जे0 के0…..
— लाखों रुपए लागत की नव निर्मित नाली का नहीं है निकास, नहीं बना डिस्चार्ज का प्लान
— अमृत सरोवर तालाब में छठ पर्व पर व्रती महिलाएं करती हैं पूजा पाठ

Sonbhadra। जनपद में विकास की एक अनोखी कहानी सामने आई है, जहां जल निकासी के लिए प्लान तैयार कर नाले का निर्माण कराया जाता है लेकिन दोनों छोर पर नाली के पानी का निकास का कोई रास्ता नहीं है।

ओबरा नगर पंचायत के वार्ड नंबर 15 खैरटिया में लाखों रुपये की लागत से नाली निर्माण का काम कराया गया है। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि नाली तो बनाई जा रही है, मगर गंदे पानी की निकासी के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। लोगों का कहना है कि अगर नाली का पानी आगे जाकर डिस्चार्ज ही नहीं होगा, तो निर्माण का वास्तविक लाभ आम जनता को कैसे मिलेगा? इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों ने गंदा पानी अमृत सरोवर में डाले जाने का भी आरोप लगाया है। अब सवाल यह है कि आखिर नाली निर्माण से पहले जल निकासी की पूरी योजना क्यों नहीं बनाई गई?

ओबरा नगर पंचायत के वार्ड नंबर 15 खैरटिया में आप देख सकते हैं कि नगर पंचायत की ओर से नाली निर्माण का कार्य किया गया है। बताया जा रहा है कि इस निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किया गया है। लेकिन इसी निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों के बीच कई सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल है नाली बनने के बाद इसमें आने वाला गंदा पानी आखिर जाएगा कहां? स्थानीय लोगों का आरोप है कि नाली के पानी के डिस्चार्ज की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है और इसी वजह से निर्माण कार्य के बावजूद जल निकासी की समस्या बनी हुई है। अब हमने स्थानीय लोगों से बात की और जानने की कोशिश की कि आखिर इस निर्माण को लेकर उनकी क्या शिकायत है।
विकास कार्यों से किसी को आपत्ति नहीं :- लेकिन विकास की योजना पर सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाली निर्माण जरूरी है, लेकिन इसके साथ जल निकासी की मुकम्मल व्यवस्था भी होनी चाहिए। लोगों का सवाल है कि जब नाली में घरों का गंदा पानी पहुंचेगा, तो उसका अंतिम डिस्चार्ज प्वाइंट क्या होगा?

स्थानीय लोग बृजेश यादव, अमरनाथ, रविन्द्र कुमार जायसवाल, रामनरेश गौड़, सोहन, जवाहर लाल सिंह गौड़, रामदेव, मनोहर, अमरनाथ नाथ उजाला, शिवदत्त दुबे, मंटू जायसवाल, राजेंद्र भारती, समेत अन्य लोगों के मुताबिक, नाली के दोनों ओर निर्माण कर दिया गया है, लेकिन पानी की निकासी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यही वजह है कि लाखों रुपये की लागत से हो रहे इस निर्माण कार्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि नाली का गंदा पानी अमृत सरोवर तालाब में छोड़ा जा रहा है।
स्वच्छता पर उठ रहे सवाल :- अगर यह आरोप सही है तो सवाल सिर्फ जल निकासी का नहीं, बल्कि तालाब की स्वच्छता और उसके इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अमृत सरोवर का इस्तेमाल धार्मिक आयोजनों और छठ पूजा के दौरान भी किया जाता है। ऐसे में उसमें गंदा पानी पहुंचने से लोगों की भावनाओं के साथ-साथ स्वच्छता को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। अब स्थानीय लोग नगर पंचायत प्रशासन से सवाल कर रहे हैं कि नाली निर्माण से पहले जल निकासी की पूरी योजना क्यों नहीं बनाई गई? और अगर डिस्चार्ज की व्यवस्था है, तो उसका अंतिम प्वाइंट क्या है?

स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल :- ओबरा नगर पंचायत के वार्ड नंबर 15 खैरटिया में नाली निर्माण का यह काम कई सवाल अपने पीछे छोड़ रहा है। स्थानीय लोग विकास कार्य के विरोध में नहीं हैं, बल्कि उनका सवाल है कि विकास ऐसा हो जिसका सीधा लाभ आम जनता को मिले। लाखों रुपये खर्च करके नाली तो बना दी जाए, लेकिन अगर उसके पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं हो, तो आने वाले समय में यही नाली लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
गंदा पानी एकत्र होने से गम्भीर बीमारी होने की आशंका :- गंदे पानी के जलभराव से स्वच्छता और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। अब सवाल नगर पंचायत प्रशासन से है—क्या नाली निर्माण से पहले जल निकासी का पूरा प्लान तैयार किया गया था? अगर किया गया था तो पानी कहां डिस्चार्ज होगा? और अगर गंदा पानी अमृत सरोवर में छोड़ा जा रहा है, तो इसकी अनुमति किस स्तर से मिली?

फिलहाल स्थानीय लोगों की नाराजगी साफ दिखाई दे रही है और वे चाहते हैं कि विकास कार्य सिर्फ कागजों तक नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर आम जनता के हित में दिखाई दे।
