संवाददाता@वीरेंद्र यादव…..
ओबी से बहकर जमा बालू के उठान और बिक्री का खेल

कोयलांचल क्षेत्र में खनिज संपदा के अवैध परिवहन और कारोबार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। थाना क्षेत्र में एनसीएल खड़िया परियोजना के डीएवी स्कूल के पीछे स्थित नाले में ओवरबर्डन (ओबी) से बहकर आए बालू के अवैध उठान और बिक्री का मामला सामने आया है। यहां लंबे समय से बालू निकालने और ट्रैक्टरों के माध्यम से परिवहन करने का सिलसिला जारी है।

इस पूरे काम में बड़ी संख्या में मजदूर, कई ट्रैक्टर और कुछ संचालक सक्रिय हैं। जयंत-शक्तिनगर मुख्य मार्ग से गुजरने वाले लोगों को नाले के आसपास फावड़ा चलाते मजदूर और कतार में खड़े ट्रैक्टर दिखाई देते हैं। मौके पर मजदूरों द्वारा बालू की लोडिंग किए जाने के साथ ट्रैक्टरों की आवाजाही भी देखी जा सकती है।

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस काम को दो मुंशी संचालित करते हैं, जो मजदूरों को लोडिंग और ट्रैक्टरों की आवाजाही को लेकर निर्देश देते नजर आते हैं। इस पूरे खेल का गणित भी काफी बड़ा बताया जा रहा है। कथित तौर पर पांच ट्रैक्टर लगाए गए हैं और प्रत्येक ट्रैक्टर से प्रतिदिन लगभग पांच ट्रिप बालू की ढुलाई की जाती है। इस तरह प्रतिदिन कुल 25 ट्रिप परिवहन होने का दावा किया जा रहा है।
यदि प्रति ट्रिप लगभग 1,500 रुपये की बिक्री या वसूली मानी जाए तो इस हिसाब से महीनेभर में यह रकम 11 लाख रुपये से अधिक बैठती है|
स्थानीय स्तर पर इस गतिविधि को गरीब और जरूरतमंद मजदूरों की आजीविका से जोड़कर उचित ठहराने की दलील भी दी जाती है। सवाल यह है कि यदि यह केवल मजदूरों के रोजगार का मामला है तो फिर कई ट्रैक्टरों की नियमित तैनाती, लगातार लोडिंग और व्यवस्थित परिवहन का संचालन किसके नियंत्रण में है।

मजदूरों की रोजी-रोटी की बात सामने रखकर इस गतिविधि के बड़े आर्थिक पहलू को नजरअंदाज किया जा रहा है। यदि बालू का व्यावसायिक उठान और बिक्री बिना वैध अनुमति हो रही है तो इसकी जिम्मेदारी केवल मजदूरों तक सीमित नहीं रह सकती। इसके पीछे वास्तविक संचालकों, परिवहनकर्ताओं और संभावित खरीदारों की भूमिका की भी जांच जरूरी है, जयंत शक्तिनगर मुख्य मार्ग पर बालू लदे ट्रैक्टरों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

लोगों का कहना है कि यदि परिवहन की अनुमति और बालू के स्रोत से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं तो इन वाहनों की नियमित आवाजाही कैसे जारी है? ट्रैक्टर चालक बेखौफ होकर मुख्य मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में परिवहन की वैधता, वाहनों के दस्तावेज और संबंधित विभागों की जांच व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
एनसीएल सुरक्षा विभाग की निगरानी पर सवाल, स्थानीय प्रशासन भी घेरे में है,यह गतिविधि एनसीएल खड़िया परियोजना के आसपास होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में एनसीएल के सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। परियोजना क्षेत्र से जुड़े स्थानों पर यदि ओबी से बहकर आए बालू का नियमित उठान और परिवहन हो रहा है तो इसकी जानकारी संबंधित सुरक्षा एवं प्रबंधन अधिकारियों को है या नहीं, यह जांच का विषय है।

वहीं, स्थानीय प्रशासन, खनन विभाग और पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। यदि बालू का उठान और बिक्री बिना वैध अनुमति हो रही है तो अब तक इसकी जांच और कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या संबंधित विभागों ने मौके का निरीक्षण किया है? क्या ट्रैक्टरों के पास परिवहन से जुड़े वैध दस्तावेज हैं| स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, खनन विभाग और एनसीएल प्रबंधन से संयुक्त जांच कराने की मांग की है।
लोगों का कहना है कि मौके पर संचालित गतिविधियों, मजदूरों की संख्या, ट्रैक्टरों के मालिकों, प्रतिदिन होने वाली ट्रिप, बालू की बिक्री और प्राप्त होने वाली रकम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ओबी से बहकर आए बालू का उठान और परिवहन वैध अनुमति के तहत हो रहा है या फिर मजदूरों की आड़ में कोई बड़ा व्यावसायिक नेटवर्क संचालित है?
यदि सब कुछ नियमानुसार है तो संबंधित विभाग इसकी वैधता सार्वजनिक करें और यदि अनियमितता है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई सुनिश्चित करें।