संवाददाता@उपेंद्र तिवारी…..
दो में से एक ट्रॉली का ढांचा टूटा, दूसरी के पहिए गायब; एंबुलेंस के स्ट्रेचर के सहारे अस्पताल पहुंचाए जा रहे मरीज

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुद्धी में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली का एक और मामला सामने आया है। अस्पताल में स्ट्रेचर ट्रॉली की भारी कमी और उपलब्ध उपकरणों की जर्जर हालत के चलते आपातकालीन मरीजों को अस्पताल के अंदर पहुंचाना भी चुनौती बन गया है। दुर्घटना में घायल मरीजों और गंभीर अवस्था में पहुंचने वाले मरीजों के तीमारदारों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, अस्पताल में पहले से मौजूद दो स्ट्रेचर ट्रॉलियों में से एक का निचला होल्डिंग हिस्सा टूट चुका है, जबकि दूसरी ट्रॉली का पहियों वाला पूरा ढांचा गायब है। ऐसे में दोनों ट्रॉलियां मरीजों को लाने-ले जाने के लिए उपयोगी नहीं रह गई हैं। आपातकालीन मरीजों के लिए उपलब्ध दो स्ट्रेचर चेयर और व्हीलचेयर भी कामचलाऊ स्थिति में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

सबसे गंभीर स्थिति तब पैदा होती है, जब अस्पताल की एकमात्र चालू ट्रॉली पर पहले से कोई मरीज भर्ती होता है। ऐसी स्थिति में एंबुलेंस कर्मियों को अपनी एंबुलेंस के स्ट्रेचर के सहारे सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों और प्रसव के लिए पहुंचने वाली महिलाओं को अस्पताल के अंदर तक लाना पड़ता है। एक साथ कई दुर्घटना पीड़ित पहुंचने पर अस्पताल कर्मियों और तीमारदारों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।

मामले की जानकारी मिलने के बाद चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वरुणा निधि के निर्देश पर नसबंदी कक्ष में रखी एक स्ट्रेचर ट्रॉली को बाहर निकलवाया गया है। फिलहाल इसी के सहारे आपातकालीन व्यवस्था संचालित की जा रही है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. निधि ने बताया कि टूटे होल्डिंग वाली स्ट्रेचर ट्रॉली की जल्द मरम्मत कराकर उसे दोबारा उपयोग में लाया जाएगा।

वहीं, स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों और जिला प्रशासन से अस्पताल में पर्याप्त संख्या में नई स्ट्रेचर ट्रॉली और व्हीलचेयर उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं का अभाव गंभीर मरीजों के उपचार में बाधा नहीं बनना चाहिए। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर उपचार दिलाने के लिए तत्काल व्यवस्था दुरुस्त की जानी चाहिए।