मुख्यालय संवाददाता@विशाल टंडन…
…पटाखों से जलने या चोट लगने पर न घबराएं, तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल पहुंचें

दीपावली खुशियों, उमंग और रोशनी का त्योहार है। इस पर्व पर घरों में दीप जलाने के साथ ही आतिशबाजी करने का भी विशेष उत्साह रहता है। बच्चे हों या बड़े, सभी पटाखे और फुलझड़ियां जलाकर त्योहार की खुशियां मनाते हैं। लेकिन थोड़ी सी लापरवाही खुशियों के इस त्योहार को हादसे में बदल सकती है।

पटाखों से जलने, आंखों में चोट लगने और आग से संबंधित दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राहुल सिंह से बातचीत की गई। उन्होंने लोगों को आतिशबाजी के दौरान सावधानी बरतने के साथ ही दुर्घटना होने पर सही प्राथमिक उपचार की जानकारी दी।

डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि दीपावली पर सबसे अधिक ध्यान बच्चों की सुरक्षा पर देने की जरूरत है। अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों को कभी भी अकेले पटाखे न जलाने दें। आतिशबाजी के समय उनके साथ मौजूद रहें और उन्हें पटाखों के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में समझाएं।

बच्चों को यह भी बताएं कि पटाखे जलाते समय जल्दबाजी या लापरवाही न करें। पटाखे हमेशा खुले स्थान पर जलाएं और आसपास ज्वलनशील पदार्थ, पेट्रोल, डीजल, गैस सिलेंडर अथवा अन्य आग पकड़ने वाली वस्तुएं न रखें।

उन्होंने कहा कि पटाखे जलाने के लिए सुरक्षित दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है। पटाखों को हाथ में रखकर नहीं जलाना चाहिए। इसके लिए लंबी अगरबत्ती का इस्तेमाल किया जा सकता है। पटाखा जलने के बाद यदि नहीं फूटता है तो उसके पास तुरंत जाकर उसे दोबारा जलाने की कोशिश न करें। आतिशबाजी के दौरान सूती कपड़े पहनना बेहतर है। ढीले और सिंथेटिक कपड़ों से बचना चाहिए। इसके साथ ही पानी की बाल्टी और रेत की व्यवस्था भी पास में रखनी चाहिए, ताकि किसी छोटी आग की स्थिति में तत्काल बचाव किया जा सके।

डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि पटाखे से जलने की स्थिति में सबसे पहले प्रभावित व्यक्ति को सुरक्षित स्थान पर ले जाएं। जले हुए हिस्से को लगभग 20 मिनट तक सामान्य ठंडे बहते पानी के नीचे रखें। इससे त्वचा की गर्मी कम करने और जलन को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

उन्होंने विशेष रूप से आगाह किया कि जले हुए स्थान पर बर्फ, टूथपेस्ट, घी, तेल, हल्दी या घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से घाव की स्थिति बिगड़ सकती है। जले हुए हिस्से पर बने फफोलों को फोड़ने और त्वचा से चिपके कपड़ों को जबरन हटाने से भी बचना चाहिए। प्राथमिक उपचार के बाद साफ, सूखी और बिना रोएं वाली पट्टी से प्रभावित स्थान को हल्के से ढक देना चाहिए।

उन्होंने बताया कि पटाखों से निकलने वाली चिंगारी या बारूद के कण आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। यदि आंख में कोई कण चला जाए तो उसे हाथ से रगड़ना नहीं चाहिए और न ही आंख पर दबाव डालना चाहिए। ऐसी स्थिति में तत्काल अस्पताल जाकर नेत्र चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। इसी तरह चेहरे, हाथ, पैर या शरीर के संवेदनशील हिस्सों में गंभीर जलन होने पर घरेलू उपचार में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।

डॉ. सिंह के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का शरीर अधिक जल गया हो, चेहरे या सांस लेने वाले हिस्से में जलन हो, सांस लेने में परेशानी हो, गहरा घाव हो अथवा अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा हो तो उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाना चाहिए।

गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को स्वयं उपचार देने के बजाय जल्द से जल्द चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस की मदद लें और डॉक्टर से संपर्क कर आगे का उपचार कराएं।

अंत में डॉ. राहुल सिंह ने लोगों से अपील की कि दीपावली पर उत्साह के साथ-साथ सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखें। बच्चों को पटाखों से दूर रखने के बजाय उनकी निगरानी में सुरक्षित तरीके से आतिशबाजी करने की सीख दें। किसी भी दुर्घटना को मामूली समझकर नजरअंदाज न करें।

सही समय पर प्राथमिक उपचार और चिकित्सकीय मदद मिलने से गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जागरूकता, सावधानी और जिम्मेदारी के साथ मनाई गई दीपावली ही वास्तव में खुशियों वाली दीपावली है।