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UP Daroga 2025 Joining News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (नागरिक पुलिस) और समकक्ष पदों की सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा पर बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने उत्तर कुंजी को चुनौती देने वाली 22 याचिकाओं को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने साफ किया कि एक्सपर्ट की राय और चयन बोर्ड की प्रक्रिया में कोई अवैधता नहीं पाई गई है. अंतिम आंसर-की पर दोबारा आपत्ति का अवसर देना संभव नहीं है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश. (फाइल फोटो)
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस में दरोगा और समकक्ष पदों की सीधी भर्ती 2025 को लेकर बड़ी खुशखबरी दी है. कोर्ट ने लिखित परीक्षा की फाइनल आंसर-की को चुनौती देने वाली 22 याचिकाओं को खारिज कर दिया है. जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की सिंगल बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की. उन्होंने श्याम सुंदर व दो अन्य सहित कुल 22 याचिकाओं खारिज कर दिया.
इस मामले में वरिष्ठ वकील अशोक खरे, प्रभाकर अवस्थी, आलोक मिश्र, संजय कुमार यादव, अतिप्रिया गौतम और राघवेंद्र मिश्र समेत कई अधिवक्ताओं ने याचियों का पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल, स्थायी अधिवक्ता राम स्वरूप उमराव और ब्रीफ होल्डर आकांक्षा मिश्रा उपस्थित रहे.
क्या था पूरा मामला और चयन प्रक्रिया?
भर्ती बोर्ड ने 12 अगस्त 2025 के विज्ञापन के तहत 4,543 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की थी. इसके तहत 14 और 15 मार्च 2026 को लिखित परीक्षा संपन्न हुई थी. इसके बाद 23 मार्च 2026 को प्रोविजनल आंसर-की जारी कर अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगी गई थीं. बोर्ड ने 32 प्रश्नों को जांच के लिए चुनकर विषय विशेषज्ञों से संदर्भ-स्रोतों सहित राय ली थी. इसके बाद 7 मई 2026 को अंतिम आंसर-की और परीक्षा परिणाम जारी किया गया, जिसमें 12,333 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए. दस्तावेज सत्यापन, शारीरिक मानक और दक्षता परीक्षा के बाद 14 जुलाई 2026 को अंतिम परिणाम घोषित हुआ, जिसमें याचिकाकर्ता सफल नहीं हो सके.
याचियों की दलीलें और कोर्ट का रुख
याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलील थी कि कुछ प्रश्नों के सही उत्तर पर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच पहले अन्य भर्तियों में निर्णय दे चुकी है, इसलिए वही उत्तर सही माना जाए. साथ ही यह भी कहा गया कि प्रोविजनल आंसर-की के बाद फाइनल आंसर-की में उत्तर बदलने पर आपत्ति का कोई अवसर नहीं दिया गया.
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने इन सभी तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि डिवीजन बेंच के पूर्व फैसले भी विशेषज्ञ समिति की राय पर आधारित थे. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रश्न पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग हो सकती है और परीक्षा आयोजित करने वाला बोर्ड ही सभी विशेषज्ञ राय पर विचार कर उत्तर की शुद्धता तय करता है, जो इस मामले में विधिवत किया गया है. अंतिम आंसर-की पर दोबारा आपत्ति न मांगने की दलील को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसा अवसर देने पर प्रक्रिया अंतहीन हो जाएगी और परिणाम कभी अंतिम नहीं हो सकेगा. चूंकि नियुक्ति पत्र जारी करने को छोड़कर चयन प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी, इसलिए याचिकाएं खारिज होने से अब आगे की राह आसान हो गई है.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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