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Bareilly Police Unique Case: जब आप थाने में किसी के खिलाफ केस या शिकायत दर्ज कराने जाओ और पुलिस आपके ही खिलाफ केस दर्ज कर ले वो भी शांतिभंग का फिर आप क्या करेंगे? किसके शरण में जाएंगे गुहार लगाने? कोर्ट या जिलाधिकारी के पास? लेकिन जब आप मुश्किल से चल पाते हों तो कैसे भ्रष्ट पुलिसवालों का सामना करेंगे. ऐसा ही कुछ बरेली की एक 80 साल की बुजुर्ग के साथ हुआ है. उनके जमीन पर कीमती पेड़ काट रहे पड़ोसी की शिकायत लेकर महिला थाने पहुंची तो पुलिस ने उनके ही खिलाफ शांतिभंग का केस कर लिया. अब महिला जिलाधिकारी की शरण में गई है. लेकिन क्या पुलिस के पास ऐसा अधिकार है कि किसी के भी खिलाफ शांतिभंग का केस दर्ज कर ले? चलिए समझते हैं
थाने में शिकायत कराने गई 80 साल की महिला पर पुलिस ने दर्ज कर दिया केस. (एआई से तस्वीर बनाई गई है.)
Bareilly Police Unique Action Against 80 Year Old Women: जब आप किसी पड़ोसी, मनचले या फिर दबंगों के अत्याचार से परेशान हो, तो आप कहां जाओगे? आपके दिमाग एक ही ख्याल आता है कि पुलिस हमारी मदद करेगी. अब पुलिस जब खुद शिकायत करने वाले पर ही शांतिभंग करने का आरोप लगा दे तो क्या होगा? वो एक 80 साल की बुजुर्ग पर. जी हां, बरेली से एक ऐसा ही केस आया है. 80 साल की एक बुजुर्ग महिला पर देवरनिया थाना में पुलिस ने शांतिभंग का केस दर्ज कर लिया. अपनी जमीन पर लगे कीमती पेड़ों को जबरन काटे जाने की शिकायत लेकर थाने पहुंची थीं. अब छड़ी और व्हीलचेयर के सहारे चलने वाली बुजुर्ग महिला डीएम से न्याय की गुहार लगाई है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, देवरनिया थाना क्षेत्र के जमुनिया गांव की रहने वाली रामा देवी के पति का काफी समय पहले निधन हो चुका है. बुजुर्ग महिला का आरोप है कि गांव का ही एक दबंग युवक उनकी निजी जमीन पर खड़े कीमती पेड़ों को जबरन काटकर बेच रहा है. जब वह अपनी इस समस्या को लेकर न्याय की गुहार लगाने स्थानीय थाने पहुंचीं, तो पुलिस ने आरोपी के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ता बुजुर्ग महिला और आरोपी दोनों पक्षों के खिलाफ ही शांतिभंग की आशंका में मुचलका पाबंद करने की नोटिस थमा दी.
क्या पुलिस शांतिभंग का केस दर्ज कर सकती है?
कानूनी और पुलिस मैनुअल के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी विवाद या अपनी शिकायत को लेकर थाने जाता है, तो पुलिस को सीधे तौर पर उसके खिलाफ शांति भंग (सीआरपीसी की धारा 151 / नई बीएनएस व्यवस्था के तहत) का मामला दर्ज करने का अधिकार नहीं है. शांति भंग की कार्रवाई केवल तभी की जा सकती है जब किसी व्यक्ति के आचरण से वास्तविक रूप से लोक शांति भंग होने या संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) करने की संभावना हो. महज़ थाने आकर अपनी शिकायत दर्ज कराने या न्याय मांगने मात्र से कोई व्यक्ति शांति भंग का आरोपी नहीं बन सकता.सुप्रीम कोर्ट और देश के अलग-अलग कोर्ट के कई स्पष्ट फैसलों में कहा गया है कि थाने में शिकायत करने पहुंचे परिवादी या पीड़ित को दबाने या परेशान करने के लिए धारा 151 का दुरुपयोग करना पूरी तरह गैरकानूनी और मनमाना है.
क्या गलत पाए जाने पर पुलिसकर्मी पर एक्शन हो सकता है?
हां, यदि जांच में यह साबित होता है कि पुलिसकर्मी ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए किसी शिकायतकर्ता को फर्जी तरीके से शांति भंग में फंसाया है, तो उस पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय जांच, निलंबन और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. पीड़ित व्यक्ति इसकी शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों (एसपी/एसएसपी) या राज्य मानवाधिकार आयोग में कर सकता है.
डीएम ने लिया संज्ञान, बनाई सात सदस्यीय समिति
पुलिस की इस संवेदनहीन कार्रवाई से आहत होकर छड़ी और व्हीलचेयर के सहारे चलने वाली लाचार रामा देवी सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं और अपनी आपबीती सुनाई. मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने त्वरित संज्ञान लिया और इसकी जांच के लिए पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की एक सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित कर दी है.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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