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Akhilesh Yadav Ayodhya Visit: रामनगरी अयोध्या में एक तरफ भव्य राम मंदिर के साथ विकास की नई इबारत लिखी जा रही है, तो दूसरी तरफ सियासत का पारा भी लगातार चढ़ रहा है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का हालिया अयोध्या दौरा और राम मंदिर में दर्शन से उनकी दूरी इस समय चर्चा के केंद्र में है. भगवान राम और कृष्ण के एक स्वरूप का हवाला देकर अयोध्या से नाता बनाए रखने की बात तो उन्होंने कही, लेकिन मंदिर की चौखट तक न जाने के फैसले को लेकर अब सीधे अयोध्या की जनता की अदालत में बहस छिड़ गई है. क्या यह आस्था का निजी दायरा है या सोची-समझी सियासी रणनीति? और सबसे अहम सवाल-क्या इसका असर आने वाले चुनावों पर दिखेगा? आइए जानते हैं अयोध्या के स्थानीय बाशिंदों की बेबाक राय.
अयोध्या: रामनगरी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद विकास, आस्था और सियासत को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं. इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे और राम मंदिर में दर्शन नहीं करने का मुद्दा भी चर्चा में है. हाल ही में अयोध्या पहुंचे अखिलेश यादव ने भगवान राम और कृष्ण को एक बताते हुए अपनी धार्मिक भावनाएं व्यक्त की थीं. साथ ही उन्होंने अयोध्या में अपना आना-जाना जारी रखने की बात कही थी. ऐसे में सवाल उठता है कि राम मंदिर से दूरी बनाने के उनके फैसले को स्थानीय लोग किस नजरिए से देखते हैं और इसका आगामी चुनावों पर कितना असर पड़ सकता है. तो चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं.
दरअसल स्थानीय लोगों की राय जानने पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं. कुछ लोगों का मानना है कि राजनीति और आस्था को अलग-अलग नजरिए से देखना चाहिए, जबकि कुछ का कहना है कि जनता चुनाव में विकास और कामकाज के आधार पर अपना फैसला करेगी.
‘राजनीति और आस्था अलग-अलग विषय’: प्रमोद
स्थानीय निवासी प्रमोद ने बताया कि राजनीति और आस्था दोनों अलग-अलग विषय हैं. कई बार लोगों की राजनीतिक विचारधारा अलग होती है, लेकिन उनकी धार्मिक आस्था में कोई कमी नहीं होती. अखिलेश यादव राम मंदिर क्यों नहीं गए, यह उनका व्यक्तिगत विषय है. भगवान राम और कृष्ण के प्रति उनकी आस्था को लेकर भी वह समय-समय पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते रहे हैं. प्रमोद का कहना है कि चुनाव में इस मुद्दे का बहुत अधिक असर नहीं पड़ेगा. भारतीय राजनीति में जातीय समीकरण और चुनावी माहौल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर नहीं जाने के बावजूद अखिलेश यादव की पार्टी के प्रत्याशी चुनाव जीत चुके हैं. इससे स्पष्ट होता है कि मतदाता केवल एक मुद्दे के आधार पर अपना फैसला नहीं करते हैं.
‘मन में सवाल हैं, लेकिन जनता विकास पर वोट देगी’: रूपेश
स्थानीय निवासी रूपेश ने बताया कि अखिलेश यादव के राम मंदिर से दूरी बनाए रखने को लेकर लोगों के मन में सवाल जरूर हैं. हालांकि भगवान राम और कृष्ण को एक बताने तथा अयोध्या में लगातार आने की बात कहने से स्थानीय लोगों के बीच एक उम्मीद भी बनी है. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने अयोध्या आने-जाने की बात कही, लेकिन इस दौरे में राम मंदिर में दर्शन-पूजन नहीं किया. इसे लेकर लोगों की अपनी-अपनी राय है. हालांकि, इसका चुनाव पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह अभी कहना मुश्किल है. अयोध्या की जनता समझदार है और आने वाले समय में विकास, अच्छे कार्यों तथा जनहित के मुद्दों को ध्यान में रखकर अपना वोट देगी.
‘हर व्यक्ति की अपनी सोच और धार्मिक मान्यता’: नरेंद्र मिश्रा
वहीं स्थानीय निवासी नरेंद्र मिश्रा ने कहा कि अखिलेश यादव राम मंदिर में दर्शन करने नहीं जाते हैं, तो यह उनकी व्यक्तिगत सोच है. हर व्यक्ति की अपनी विचारधारा और धार्मिक मान्यताएं होती हैं. उन्होंने कहा कि भगवान राम और कृष्ण के प्रति प्रेम रखने वाले लोग बड़ी संख्या में हैं और वह स्वयं भी प्रभु राम के भक्त हैं. अखिलेश यादव के राम मंदिर नहीं जाने का चुनाव पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है. फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि आगामी चुनाव में किस पार्टी को बढ़त मिलेगी.
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Rahul Goel is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at News18 Hindi, managing State and Local18 content operations a…
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