Mulayam Singh Yadav Death Anniversary: आज यानी 10 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की पुण्यतिथि है. यूपी के मुख्यमंत्री पद के लिए तीन शपथ लेने वाले मुलायम सिंह यादव कभी पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए. देश के रक्षा मंत्री के रूप में अपनी सेवा देने वाले मुलायम सिंह यादव को चंबल में डकैतों के सफाया के लिए भी याद किया जाता है. घाटी में बरसों से आतंक मचाए खूंखार डाकुओं के खात्मे के लिए उन्होंने टास्क फोर्स तक गठित कर दी थी. चंबल के खूंखार डाकुओं के खौफ को कभी भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन 2004 से शुरू किए गए अभियान के बाद चंबल घाटी को डकैतों से पूरी तरह मुक्त कर लिया गया.
यह काम किया है प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए अपने मुलायम सिंह यादव ने. वे इन डाकुओं के लिए भस्मासुर बन गए थे. चंबल घाटी से एक-एक करके तमाम डकैतों का सफाया कर दिया गया. इसके साथ ही डकैतों के आतंक का सफाया हो गया. पहले लोग कभी चंबल घाटियों की ओर जाने से डरते थे. अब वहां सभी कुछ सामान्य रूप से हो रहा है.
डाकुओं का सफाया
चंबल घाटी में लंबे समय तक डाकुओं का आतंक रहा है. वे लूटपाट और डकैती के साथ ही अपहरण जैसी मामलों में भी सक्रिय रहते थे, जिसके चलते इलाके भर के लोग परेशान रहते थे. कई बार प्रयास किए जाने के बाद भी इन डकैतों का सफाया नहीं हो सका, लेकिन साल 2004 में सरकार बनने के बाद जब मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो फिर एक अभियान चला कर इन डकैतों का सफाया कर दिया गया.
काफी दिलचस्प है कहानी
डकैतों के सफाए की शुरुआत की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है. उस समय बीहड के क्षेत्र में निर्भय गुर्जर को दस्यु सम्राट कहा जाता था. उसका काफी आतंक था. निर्भय गुर्जर ने कह दिया कि नेताजी मुलायम सिंह यादव मेरे बड़े भाई हैं और कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव मेरे छोटे भाई हैं. बस निर्भय गुर्जर का यही बयान डकैतों की सफाए के लिए अभियान चलाए जाने की शुरुआत का बड़ा कारण बन गया.
एक बार डकैत निर्भय गुर्जर ने मुलायम सिंह यादव को भाई बता दिया था, जिसके बात डाकुओं की सफाई अभियान चलाई गई.
एक्टिव हुई पुलिस
निर्भय गुर्जर के बयान से राजनीतिक हड़कंप मच गया. यूपी की मुलायम सरकार ने पुलिस को सक्रिय कर दिया. डकैतों के सफाए के निर्देश दे दिए गए. इसके बाद चंबल की घाटी में सालों से आतंक मचाए खूंखार डाकुओं का सफाया हो गया. 2004 से शुरू हुए इस अभियान में 2 साल में ही चंबल घाटी को डकैतों से मुक्त कर दिया गया. डकैत या तो मारे गए या फिर गिरफ्तार करके जेल भेज दिए गए.
पुलिसकर्मी की जुबानी डकैतों के सफाए की कहानी
यूपी पुलिस के पूर्व सीओ रामनाथ सिंह बताते है कि 2004 में जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तब डकैतों का काफी आतंक था. चकरनगर, लबेदी, भरेह, बकेवर लखना क्षेत्र में बड़ी संख्या में डकैती गिरोह फैले थी. इनका साम्राज्य-सा चलता था, लेकिन सरकार का निर्देश मिल जाने के बाद पुलिस ने जोरदार अभियान चलाया और पूरी चंबल घाटी को डकैतों से मुक्त करा लिया.
मुख्यमंत्री पद के लिए शपथ लेते मुलायम सिंह यादव
इटावा के वरिष्ठ पत्रकार वीरेश मिश्रा बताते हैं कि चंबल घाटी में डकैतों के आतंक का शोर दूर-दूर तक था. लोग दिन में भी उसे क्षेत्र में जाने से डरते थे, लेकिन सरकार ने जब डकैतों की सफाए का दृढ़ संकल्प ले लिया तो फिर ऐसा अभियान चला कि चंबल घाटी से डकैतों का पूरी तरह सफाया ही कर दिया गया .
एक-एक करके सबका सफाया
साल 2003 में नेताजी मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद डकैतों के खिलाफ अभियान शुरू किए गए. सबसे पहले कुख्यात डकैत सरगना राम आसरे उर्फ फक्कड़ और कुसमा नाइन ने अपने गैंग के 9 डाकुओं के साथ यूपी छोड़ मध्य प्रदेश के रावतपुरा सरकार के आश्रम में मध्य प्रदेश पुलिस के सामने आत्म समर्पण कर दिया. ऐसा ही कुछ अन्य डकैतों जैसे कि अरविंद गुर्जर और रामवीर गुर्जर ने किए. अपने गैंग के एक दर्जन सदस्यों के साथ मध्य प्रदेश में समर्पण किया. इटावा पुलिस का लगातार डाकुओं के खिलाफ अभियान का सिलसिला इस कदर चला कि सैकड़ो की संख्या में छोटे-मोटे डाकुओं ने पुलिस के दर से आत्मसमर्पण कर दिया या फिर गिरफ्तार कर लिए गए.
निर्भय गुर्जर आतंक का दूसरा नाम
चंबल घाटी में निर्भय गुर्जर का नाम उस समय खासे आतंक के रूप में लिया जाता था. निर्भय गुर्जर ने एक मीडिया इंटरव्यू में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को अपना बड़ा भाई और उनके भाई शिवपाल सिंह यादव को छोटा भाई बता करके समर्पण की पेशकश की. इसके बाद खुद मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने यूपी के डीजीपी यशपाल सिंह को डाकुओं के खात्मे के आदेश दिए. इसके बाद चलाए गए अभियान में निर्भय गुर्जर एसटीएफ के हाथों औरैया जिले में अजीतमल इलाके में हुई एक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया. 7 नबंवर 2005 को हुई मुठभेड़ में निर्भय गुर्जर एसटीएफ से हुई मुठभेड़ में मारा गया.

