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Pitra Amavasya: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर पंडित सुभाष पांडेय ने बताया की आश्विन कृष्ण अमावस्या तिथि को सर्व पितृ अमावस्या कहते है.इस दिन पितरों के विदाई के साथ ही पितृ पक्ष समाप्त होता हैं. इस साल पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को हैं.
वाराणसी: पितरों को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए पितृ पक्ष के 15 दिनों को बेहद खास माना जाता है. इन 15 दिनों में अलग-अलग तिथियों का अपना विशेष महत्व होता है. पितृ अमावस्या के दिन पितरों की विदाई की जाती है. पितरों की विदाई का समय अब करीब आ रहा है. जिन्हें अपने पूर्वजों की तिथि याद नहीं होती, वे पितृ अमावस्या के दिन उनका श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं. इस दिन सभी पितरों के निमित्त जल अर्पित किया जाता है. पितरों की विदाई के दौरान कुछ खास बातों का ध्यान भी जरूर रखना चाहिए.
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर पंडित सुभाष पांडेय ने बताया कि आश्विन कृष्ण अमावस्या तिथि को सर्वपितृ अमावस्या कहते हैं. इस दिन पितरों की विदाई के साथ ही पितृ पक्ष समाप्त होता है. इस साल पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को है. पितरों की विदाई के दौरान ब्राह्मणों को भोजन अवश्य कराना चाहिए. व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार, विषम संख्या में ब्राह्मणों को श्राद्ध और तर्पण के बाद भरपेट भोजन कराना चाहिए. भोजन शुद्ध और सात्विक हो, इसका ध्यान भी रखना चाहिए.
कच्चे अनाज का करें दान
जो व्यक्ति ब्राह्मणों को भोजन नहीं करा पाते, उन्हें पितरों के निमित्त कच्चे अनाज का दान जरूरतमंदों और श्राद्ध-तर्पण कराने वाले पुरोहित को करना चाहिए. अनाज में चावल, गेहूं और सब्जियों जैसी चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए. अनाज इतना होना चाहिए कि उससे ब्राह्मण का पूरा परिवार कम से कम एक दिन भोजन कर सके.
गाय को कराएं भोजन
इसके अलावा, इस दिन गाय को हरा चारा भी खिला सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे भी पितर प्रसन्न होते हैं और जाते-जाते मनुष्य को आशीर्वाद देते हैं. मान्यता है कि गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है. ऐसे में जो लोग कच्चे अनाज का दान या ब्राह्मणों को भोजन नहीं करा पाते, वे गाय को हरा चारा खिला सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे पितर प्रसन्न होकर अपने लोक चले जाते हैं.
जरूर जलाएं दीप
पितृ अमावस्या के दिन शाम के वक्त दीपदान भी जरूर करना चाहिए. घर के बाहर चार मुख वाला दीपक जलाकर ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए कि उनके पितर अपने लोक की ओर प्रस्थान करें. चार मुख वाले इस दीपक को घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर रखना चाहिए. भोजन के अलावा, इस दिन ब्राह्मणों को कपड़े, छाते और जरूरत की अन्य चीजों का दान भी करना चाहिए.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…
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