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Sambhal: सहारनपुर की आयशा मस्जिद में लाउडस्पीकर से अजान को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर तरह-तरह के बयान आ रहे हैं. संभल के सांसद जिया उर रहमान बर्क के पिता ममलूक उर रहमान बर्क ने इस फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि अदालत का फैसला पूरी तरह से निष्पक्ष और संविधान सम्मत है. बर्क ने प्रशासनिक अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि मस्जिद प्रबंधन 2020 की गाइडलाइंस का पालन करते हुए हलफनामा देता है, उसके बावजूद अफसरों ने अजान की अनुमति नहीं दी तो वे मुजरिम होंगे.
संभल सांसद बर्क के पिता ने अजान को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है.
संभल: सहारनपुर की आयशा मस्जिद में पांच वक्त की अजान को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सियासी पारा चढ़ गया है. संभल से समाजवादी पार्टी सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता ममलूकुर्रहमान बर्क ने हाईकोर्ट के इस आदेश का स्वागत किया है. उन्होंने अदालत के फैसले को निष्पक्ष बताया है. उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसलों से न्यायपालिका पर आम जनता का विश्वास और मजबूत होता है. साथ ही उन्होंने ध्वनी प्रदूषण को लेकर तमाम अफसरों के दावों पर कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान यह नियम क्यों नहीं लागू होता?
ममलूकुर्रहमान बर्क ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से सवाल पूछा है. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार, यदि मस्जिद के इमाम या मुतवल्ली ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 और वर्ष 2020 की तय गाइडलाइंस के तहत हलफनामा (एफिडेविट) देकर अनुमति मांगते हैं, तो अधिकारियों को लाउडस्पीकर से अजान की अनुमति देनी होगी. बर्क ने दो टूक कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद भी यदि कोई अधिकारी अनुमति नहीं देता है, तो वह सीधे तौर पर संविधान की खिलाफत करेगा और ऐसे अधिकारी को दोषी माना जाएगा.
कांवड़ यात्रा पर उठाए सवाल
सांसद के पिता ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कांवड़ यात्रा का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अजान में महज दो से तीन मिनट का समय लगता है, जिससे कोई ध्वनि प्रदूषण नहीं होता. जबकि दूसरी तरफ कांवड़ियों के तेज आवाज में बजने वाले डीजे पर प्रशासन कोई रोक नहीं लगाता. उन्होंने सवाल किया कि जब वहां नियमों की अनदेखी होती है, तो फिर दो मिनट की अजान पर ही पाबंदी क्यों थोपी जा रही है? उन्होंने कहा कि पूरे यूपी में हमेशा से अजान होती रही है, इसलिए बेवजह अड़चन डालना गलत है.
गाइडलाइंस पालन करने की सलाह
बर्क ने मस्जिद कमेटी को पूरा कानूनी और नैतिक समर्थन देने की बात कही है. उन्होंने बताया कि वे जल्द ही मुतवल्लियों और इमामों के साथ बैठक कर गाइडलाइंस का पालन सुनिश्चित कराएंगे और जिला प्रशासन से अनुमति मांगेंगे. यदि इसके बावजूद अधिकारी मनमानी करते हैं, तो वे मामले को लेकर दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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