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Meerut Blue Drum Murder Case : नीले ड्रम हत्याकांड में मेरठ की जिला अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी करार है. अगले 15 दिन में दोनों को सजा सुनाई जाएगी. लोकल 18 ने इस बारे में सौरभ राजपूत की बुआ, ताई और उनके वकील से बात की. वकील विजय बहादुर ने बताया कि जिला जज मेरठ की ओर से मुस्कान और साहिल को सौरभ की हत्या और शव को छिपाने का दोषी पाया है. सौरभ की बुआ कुसुम ने कहा कि साहिल और मुस्कान को फांसी की सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी प्रेमी प्रेमिका इस तरह का अपराध न करे. 3 मार्च 2025 को सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उनके शव के टुकड़े कर उसे नीले रंग के ड्रम में भर दिया गया था.
मेरठ. पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सौरभ राजपूत हत्याकांड में 18 महीने बाद जिला न्यायालय ने मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया है. ये केस नीला ड्रम हत्याकांड के नाम से लंबे समय से सुर्खियों में है. अगले 15 दिनों के बाद दोनों ही दोषियों को सजा सुनाई जाएगी. इस बारे में लोकल 18 की टीम ने सौरभ राजपूत की बुआ, ताई और उनके वकील से बात की. सौरभ राजपूत के वकील विजय बहादुर ने बताया कि जिला जज मेरठ की ओर से मुस्कान और साहिल को सौरभ की हत्या और डेड बॉडी छिपाने के मामले में दोषी करार दिया है. अब इसमें अगले 15 दिनों में तारीख निश्चित कर जिला जज की ओर से सजा सुनाई जाएगी.
‘अकेले नहीं कर पाती ऐसा अपराध’
सौरभ राजपूत की बुआ कुसुम ने लोकल 18 से कहा कि जिस तरह से आज न्यायालय ने साहिल और मुस्कान को दोषी करार दिया है, यह न्याय की महत्वपूर्ण कड़ी है. हमारी मांग है कि साहिल और मुस्कान को फांसी की सजा दी जाए. कुसुम का कहना है कि जो यह जघन्य अपराध दोनों ने मिलकर किया, इसमें साहिल की ज्यादा भूमिका रही है. अगर साहिल इस तरह मुस्कान का साथ नहीं देता तो वह अकेले इतने बड़े अपराध को अंजाम नहीं दे पाती. दोनों को फांसी की सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी प्रेमी प्रेमिका इस तरह का अपराध न करे. सौरभ राजपूत की मां और भाई ने भी फांसी की मांग की है.
22 लोगों ने दी गवाही
3 मार्च 2025 को सौरभ राजपूत की हत्या के बाद उनके शव को नीले ड्रम में टुकड़े करके भर दिया गया था. इसके बाद मुस्कान अपने प्रेमी के साथ घूमने निकल गई. 17 मार्च 2025 को इस केस की जानकारी पुलिस को लगी. इसके बाद पुलिस ने छानबीन की तो मुस्कान और साहिल की कारनामों का पता चला. तब से लेकर अब तक अदालत में सुनवाई होती आई है. इस तरह लगभग 545 दिन तक इस केस सुनवाई चली. 126 तारीख पर 22 गवाह ने गवाही दी और आज दोनों को दोषी करार दिया गया.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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