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Agra ki local news : आगरा में स्पोर्ट्स और कैजुअल के साथ फॉर्मल, लोफर समेत कई तरह के जूते बनाए जाते हैं. इस जूतों की देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अच्छी मांग है. इन जूतों को बनाया कैसे जाता है, लोकल 18 ने इस बारे में कैडेन ओवरसीज शूज फैक्ट्री के डायरेक्टर शोजफ से बात की. शोजफ बताते हैं कि जूते बनाने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है. सबसे पहले डिजाइन के अनुसार मटेरियल की कटिंग की जाती है. हर चरण के बाद जूते की फिटिंग और गुणवत्ता की जांच की जाती है. शोजफ बताते हैं कि जूते की एक छोटी सी कमी भी उसकी गुणवत्ता को खराब कर सकती है. दोनों जूतों का आकार, शेप और फिटिंग एक समान होना जरूरी है.
आगरा. ताजनगरी आगरा का स्पोर्ट्स शूज की देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अच्छी मांग है. शहर में स्पोर्ट्स और कैजुअल के साथ फॉर्मल, लोफर समेत कई तरह के जूते बनाए जाते हैं. इन जूतों की मैन्युफैक्चरिंग आगरा की कैडेन ओवरसीज शूज फैक्ट्री में की जाती है. लोकल 18 से फैक्ट्री के डायरेक्टर शोजफ बताते हैं कि जूते तैयार करने के दौरान हर छोटी-बड़ी बारीकी का ध्यान रखा जाता है. जूते बनाने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है. सबसे पहले डिजाइन के अनुसार मटेरियल की कटिंग की जाती है. इसके बाद कटे हुए हिस्सों की चेकिंग, सिलाई, अपर की तैयारी और सोल लगाने जैसे काम अलग-अलग कारीगर करते हैं. हर चरण के बाद जूते की फिटिंग और गुणवत्ता की जांच की जाती है.
शोजफ के मुताबिक, कपड़ों में थोड़ा बहुत आकार का अंतर होने पर उन्हें पहना जा सकता है, लेकिन जूते फिट नहीं होंगे तो उनका इस्तेमाल मुश्किल हो जाता है. इसलिए जूते की फिटिंग, मजबूती और फिनिशिंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है. अंतिम क्वालिटी चेक के बाद ही तैयार जूतों को बाजार के लिए भेजा जाता है. शोजफ बताते हैं कि आगरा में तैयार ये जूते भारत के अलावा यूरोप के कई देशों तक पहुंचते हैं. अमेरिका में भी आगरा के इन जूतों की अच्छी डिमांड है.
19-20 भी नहीं हो सकता
शोजफ बताते हैं कि जूते तैयार करने के दौरान उनके आकार और फिटिंग की बेहद बारीकी से जांच की जाती है. जूते की एक छोटी सी कमी भी उसकी गुणवत्ता को खराब कर सकती है. दोनों जूतों का आकार, शेप और फिटिंग एक समान होना जरूरी है. अगर एक जूता दूसरे से 19-20 भी हुआ तो उसे रिजेक्ट कर दिया जाता है. इसके लिए अलग-अलग चरणों में कई कारीगर जूतों की बारीकी से जांच करते हैं. सिलाई, शेप और फिनिशिंग की जांच के बाद जूतों को अंतिम क्वालिटी चेक के लिए भेजा जाता है. सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही जूतों को फाइनल कर बाजार और निर्यात के लिए तैयार किया जाता है.
शोजफ कहते हैं कि आगरा में बनने वाले स्पोर्ट्स, कैजुअल और दूसरे प्रकार के जूतों की विदेशी बाजारों में अच्छी मांग है. आगरा से तैयार जूते यूरोप के कई देशों में भेजे जाते हैं, जहां इनकी अच्छी खपत है. जर्मनी भी प्रमुख विदेशी बाजारों में शामिल है, जहां आगरा में बने जूतों को पसंद किया जाता है. बेहतर डिजाइन, फिटिंग, फिनिशिंग और गुणवत्ता की वजह से आगरा का फुटवियर कारोबार अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच चुका है.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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