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Agra ki local news : आगरा के बच्चों में रेस्पिरेटरी संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं. यह ऐसा संक्रमण है जो हमारे नाक, साइनस, गला, श्वास नली या फेफड़ों पर हमला करता है. कई बच्चों में इसके लक्षण एक सप्ताह से अधिक तक बने रह सकते हैं. लोकल 18 से आगरा जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आशीष मित्तल बताते हैं कि बच्चों में लगातार बुखार रहने पर इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें. समय पर उपचार नहीं मिलने पर संक्रमण बढ़कर निमोनिया का रूप ले सकता है. मौसम में बदलाव और संक्रमण के तेजी से फैलने की वजह से अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या 200 के पार पहुंच गई है. लक्षण दिखने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने से बचें.
आगरा. ताजनगरी आगरा के जिला अस्पताल में इन दिनों बीमार बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. बच्चों में रेस्पिरेटरी संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं. यह ऐसा संक्रमण है जो हमारे सांस लेने वाले तंत्र (नाक, साइनस, गला, श्वास नली या फेफड़ों) को प्रभावित करता है. सामान्य दिनों में जिला अस्पताल की ओपीडी करीब 150 मरीजों तक रहती थी, जो बढ़कर 200 से अधिक पहुंच गई है. बच्चों में तेज बुखार, खांसी, जुकाम, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं. कई बच्चों में लक्षण एक सप्ताह से अधिक समय तक बने रह सकते हैं. इससे बचाव के लिए बच्चों को धूल-धुएं और भीड़भाड़ वाली जगहों से बचाएं, हाथों की नियमित सफाई कराएं, पर्याप्त पानी और पौष्टिक आहार दें. घर में किसी सदस्य को खांसी-जुकाम हो तो बच्चे से दूरी रखें और मास्क का इस्तेमाल करें. कमरे में हवा का उचित आवागमन रखें. तेज बुखार, लगातार खांसी, सांस फूलना, सुस्ती या खाना-पीना कम होने पर बच्चे को तुरंत चिकित्सक को दिखाएं. बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं न दें.
भारी पड़ सकती है लापरवाही
लोकल 18 से जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. आशीष मित्तल बताते हैं कि बच्चों में लगातार बुखार रहने पर इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. कई बार अभिभावक बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं दे देते हैं, जिससे बीमारी कम होने के बजाय बढ़ सकती है. खासकर लगातार बुखार, खांसी और सांस संबंधी परेशानी में लापरवाही भारी पड़ सकती है. समय पर उपचार नहीं मिलने पर संक्रमण बढ़कर निमोनिया का रूप ले सकता है.
हर उम्र को बना रहा शिकार
डॉ. आशीष कहते हैं कि रेस्पिरेटरी संक्रमण का असर केवल बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उम्र के लोगों में इसके मामले सामने आ रहे हैं. मौसम में बदलाव और संक्रमण के तेजी से फैलने के कारण अस्पताल की ओपीडी 200 के पार पहुंच गई है. ऐसे समय में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. खांसी, जुकाम, बुखार, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही न करें. भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, हाथों की नियमित सफाई रखें और संक्रमित व्यक्ति से उचित दूरी बनाए रखें. लक्षण लगातार बने रहने पर डॉक्टर से जांच कराएं और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लेने से बचें.
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प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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