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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों और सियासी हलचल तेज हो गई है. सत्ता और विपक्ष दोनों ही ‘युवा संवाद’ और ‘छात्रों की गूंज’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए छात्रों तक पहुंच रहे हैं. लेकिन क्या ये सियासी संवाद छात्रों के लिए असल में कोई मायने रखते हैं? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने मेरठ की कॉलेज छात्राओं से बात की. छात्राओं ने बेबाकी से अपनी राय रखते हुए साफ कहा कि महंगी फीस और बढ़ते कॉम्पिटिशन के दौर में उन्हें नेताओं के वादे नहीं, बल्कि रोजगार और समस्याओं का ठोस समाधान चाहिए.
मेरठ में छात्रों की सरकार से क्या शिकायत?
मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सीएम योगी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के मेरठ दौरा के बाद से सियासी गरमी तेज हो गई है. युवाओं और छात्रों को अपने पाले में करने के लिए राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है. एक तरफ सत्ता पक्ष ‘युवा संवाद’ जैसे कार्यक्रमों से छात्रों को अपने विजन के बारे में बता रहा है, तो दूसरी तरफ विपक्ष ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए युवाओं की आवाज बनने का दावा पेश कर रहा है. लेकिन इन सियासी दावों के बीच पश्चिमी यूपी के छात्रों का असली मूड क्या है? राजनीतिक संवाद उनके लिए कितने मायने रखते हैं? इसका जमीनी सच जानने के लिए जब मेरठ की कॉलेज छात्राओं से बात की गई, तो उनकी बेहद बेबाक और आंखें खोलने वाली प्रतिक्रिया सामने आई.
छात्राओं का साफ तौर पर कहना है कि राजनीतिक दलों के ऐसे प्रोग्राम अपनी जगह ठीक हैं, क्योंकि कम से कम इनके जरिए छात्रों की समस्याओं को मंच मिलता है और उन्हें एड्रेस किया जाता है. लेकिन छात्राओं का बड़ा सवाल यह है कि इन समस्याओं का समाधान कब निकलेगा? नेताओं के वादों और भाषणों से पेट नहीं भरता, युवाओं को धरातल पर ठोस कदम चाहिए.
महंगी फीस और घटती जॉब अपॉर्चुनिटी का दर्द
मेरठ की छात्राओं ने सबसे बड़ा मुद्दा कॉलेज की महंगी फीस और रोजगार के संकट को लेकर उठाया. उनका कहना है कि आज के दौर में शिक्षा बहुत महंगी हो गई है. कॉलेजों की फीस लगातार बढ़ रही है, लेकिन जिस हिसाब से फीस ली जा रही है, उस हिसाब से बाजार में नौकरियां उपलब्ध नहीं हैं. छात्राओं ने चिंता जताते हुए कहा कि आज हर क्षेत्र में कॉम्पिटिशन बहुत ज्यादा बढ़ गया है, इसलिए सरकार को जॉब अपॉर्चुनिटी (Job Opportunities) भी तेजी से बढ़ानी चाहिए, ताकि उनकी डिग्री बेकार न जाए.
घर के पास मिले अच्छी शिक्षा
छात्राओं ने एक और बहुत अहम मांग सरकार के सामने रखी. उनका कहना है कि प्रदेश के हर हिस्से और हर जिले में बेहतरीन कोर्स और शिक्षा की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए. आज भी कई प्रोफेशनल और अच्छे कोर्सेज की पढ़ाई के लिए लड़कियों को अपना घर-परिवार छोड़कर दूर-दराज के बड़े शहरों में जाना पड़ता है. यदि स्थानीय स्तर पर ही अच्छी शिक्षा मिलेगी, तो सुरक्षा के साथ-साथ समय और पैसे दोनों की बचत होगी.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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