संवाददाता@विजय अग्रहरी….

विभिन्न विभागों के मानदेय में बढ़ोतरी किए जाने के बावजूद आशा और आशा संगिनियों की अनदेखी किए जाने से उनमें आक्रोश है। सोमवार को तहसील क्षेत्र की 11 आशा संगिनियों ने अपनी समस्याएं मीडिया के सामने रखते हुए मानदेय बढ़ाने की मांग की।
बेबी पटेल और राजकुमारी ने बताया कि आशा संगिनियां करीब 300 रुपये प्रतिदिन के मानदेय पर कार्य कर रही हैं। गांवों में घर-घर भ्रमण कर स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी देने के साथ आयुष्मान कार्ड, टीकाकरण, स्वास्थ्य योजनाओं के प्रचार-प्रसार और विभागीय बैठकों में प्रतिभाग करने की जिम्मेदारी भी निभाती हैं। इसके बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान जब लोग घरों से निकलने से बच रहे थे, तब आशा और आशा संगिनियों ने गांव-गांव पहुंचकर स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और जागरूकता कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद भी मानदेय में अपेक्षित वृद्धि नहीं की गई।
आशा संगिनियों ने सरकार से मानदेय बढ़ाने के साथ उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगी।
इस दौरान विमलावती देवी, रुखसाना बेगम, सीमा देवी, राजकुमारी, श्याम कुमारी, सुनीता मौर्य, बेबी पटेल, शीला देवी, मंजू देवी, अंजू श्रीवास्तव और माफिया खातून मौजूद रहीं।