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Sakshi Chaudhary: पटियाला ट्रायल में साक्षी चौधरी ने 51 किग्रा में निकहत जरीन और मीनाक्षी हुड्डा जैसी विश्व चैंपियनों को हराकर राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों का कोटा जीता
साक्षी चौधरी
पटियाला: साक्षी चौधरी पटियाला में चयन ट्रायल्स के तीन दिनों तक उस मुक्केबाज की तरह रिंग में उतरीं, जिनके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं बचा था. ‘भिवानी बॉक्सिंग क्लब’ की 25 वर्षीय इस मुक्केबाज ने असफलताओं, निराशा और आत्म-संदेह के बोझ के साथ राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों के चयन ट्रायल्स में कदम रखा था, लेकिन शानदार प्रदर्शन के दम पर 51 किग्रा वर्ग में दोनों बड़े बहु-खेल आयोजनों के लिए अपना पहला टिकट हासिल कर लिया.
साक्षी ने लगातार दो मुकाबलों में विश्व चैंपियनों को हराकर यह उपलब्धि हासिल की. उन्होंने कहा:
मेरी सोच स्पष्ट थी कि मुझे किसी भी तरह कोटा हासिल करना था. यह मेरे लिए करो या मरो जैसा था. मेरे लिए राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में जाना बहुत जरूरी था. मैं 2012 से पूरी मेहनत और अनुशासन के साथ अभ्यास कर रही हूं, इसलिए मैं यह मौका किसी भी हालत में नहीं खोना चाहती थी.
हाल ही तक उनका करियर संघर्षों से भरा रहा था. पिछले साल विश्व चैंपियनशिप में वह पेरिस ओलंपिक रजत पदक विजेता हतिसे अकबास से अंतिम 16 मैच में में हार गई थीं. इसके बाद राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी उनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा और वे पदक दौर तक नहीं पहुंच सकीं, इसके बाद भारतीय मुक्केबाजी संघ (बीएफआई) की मूल्यांकन प्रक्रिया में तीसरे स्थान पर रहने के बावजूद उन्हें एशियाई चैंपियनशिप के लिए 54 किग्रा वर्ग में जगह नहीं मिली, जबकि प्रीति पवार ने उस स्पर्धा में स्वर्ण जीतकर कोटा हासिल किया.
दो बड़े बहु-खेल आयोजनों में खेलने की इच्छा के चलते साक्षी ने एक बड़ा फैसला लिया और 51 किग्रा वर्ग में उतरने का निर्णय किया, जहां दो बार की विश्व चैंपियन निकहत जरीन का दबदबा माना जाता है.
साक्षी पहले ही 2022 की चोट के कारण राष्ट्रीय शिविर से बाहर हो गई थीं, जिससे वे पिछली बार के चयन ट्रायल्स में भी हिस्सा नहीं ले सकी थीं. दो बार की युवा और जूनियर विश्व चैंपियन होने के बावजूद उन्हें दोबारा अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा. ट्रायल में उन्होंने पहले क्वार्टर फाइनल में तनु को हराया और फिर सेमीफाइनल व फाइनल में बेहतरीन रणनीति के साथ मुकाबले जीते.
निकहत के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने कहा, ‘मुझे पता था कि वह बहुत मजबूत इरादों वाली हैं. अगर मैं उनके मुक्कों के पहुंच में गई तो वह मुझे मौका नहीं देंगी. मेरी ताकत दूरी से खेलना और बायें मुक्के का इस्तेमाल करना है, इसलिए मैंने उसी पर ध्यान दिया. उन्होंने अपनी रणनीति को पूरी तरह लागू किया और तेज मूवमेंट तथा सटीक जैब से निकहत को दूर रखा. यही रणनीति उन्होंने मौजूदा 48 किग्रा विश्व चैंपियनमीनाक्षी हुड्डा के खिलाफ भी अपनाई.
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अंशुल तलमले फरवरी 2025 से नेटवर्क18 ग्रुप में डिप्टी न्यूज एडिटर की जर्सी पहनकर स्पोर्ट्स डेस्क की कप्तानी कर रहे हैं. यहां स्पोर्ट्स कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल डायरेक्शन एंड स्ट्रेटजी मेकिंग का रोल संभाल रहे अ…और पढ़ें
