नई दिल्ली: साल 2025 की सर्वश्रेष्ठ पैरा तीरंदाज चुनी गई दुनिया की नंबर एक शीतल देवी का मानना है कि यह सम्मान बरसों की कड़ी मेहनत, नाकामियों और चुपचाप किए गए बलिदानों को दर्शाता है और उनका फलसफा यही है कि किसी और को अपनी सीमायें तय करने नहीं दें.
दुनिया की नंबर एक पैरा तीरंदाज शीतल को विश्व तीरंदाजी ने सोमवार को साल 2025 का सर्वश्रेष्ठ पैरा तीरंदाज चुना जो उनकी असाधारण उपलब्धियों में एक और इजाफा है. बैंकॉक में एक टूर्नामेंट में भाग ले रही शीतल ने भाषा से खास बातचीत में कहा:
यह अद्भुत है. दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पैरा तीरंदाजों में नामांकन मिलना ही खास था और यह पुरस्कार जीतना यादगार और बहुत खास है. यह हर घंटे की कड़ी मेहनत, हर नाकामी और चुपचाप किए गए बलिदानों को दर्शाता है.
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ की 19 वर्ष की पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने दक्षिण कोरिया में 2025 विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियनशिप में गत चैंपियन और तत्कालीन नंबर एक तीरंदाज तुर्की की ओजनुर क्यूरे को हराकर खिताब जीता था. वह विश्व चैंपियनशिप खिताब जीतने वाली पहली भुजाहीन महिला तीरंदाज भी बनी.
शीतल ने कहा, ‘यह माता रानी का आशीर्वाद है और उनकी कृपा मुझ पर हमेशा रहती है. मैं अपने परिवार, कोच, टीम और मेरे साथ विकट परिस्थितियों में भी खड़े रहने वाले हर व्यक्ति को इसका श्रेय देती हूं.’
उदीयमान खिलाड़ियों को क्या सुझाव देंगी, यह पूछने पर उन्होंने कहा कि सभी को संयम के साथ प्रक्रिया पर भरोसा करते हुए आगे बढना चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘किसी और को अपनी सीमायें तय मत करने दो. आपका सफर अपना है, जिसमें संयम बनाए रखते हुए प्रक्रिया पर भरोसा रखो और हर दिन बेहतर करने की कोशिश करो. किसी में कोई कमी नहीं होती बस थोड़ी मेहनत की कमी होती है.’
अपने करियर की अब तक की सबसे बड़ी चुनौती के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि पिछले साल नयी तकनीक सीखना सबसे चुनौतीपूर्ण था. उन्होंने कहा, ‘नई तकनीक सीखना आसान नहीं था. उस समय नतीजे नहीं मिल रहे थे और लोग मेरी काबिलियत पर संदेह करने लगे थे. मैंने समारोहों में जाना और इंटरव्यू देना बंद कर दिया, जिससे सवाल और संदेह बढ़ते गए. मैंने अपना पूरा फोकस ट्रेनिंग पर लगा दिया, इससे मुझे दृढता मिली और आत्मविश्वास भी.’
पिछले साल विश्व तीरंदाजी महासंघ ने नियमों में बदलाव किया. पहले वह धनुष को एड़ी से छूकर निशाना लगा सकती थी, लेकिन अब केवल पैर के अंगूठे और अगले हिस्से से ही निशाना लगाने की अनुमति है.
उनके कोच गौरव शर्मा ने कहा, ‘इसके मायने थे कि हमें नए सिरे से शुरूआत करनी पड़ी. इसमें काफी संयम और समय लगा. इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना था कि वह दबाव झेलने के लिए मानसिक रूप से मजबूत रहे. हमने एक टीम के रूप में एक एक बाधा को पार किया.’
इस साल बड़े टूर्नामेंटों में पदक जीतने पर फोकस करने वाली शीतल हफ्ते में छह दिन कड़ा अभ्यास कर रही है. शीतल ने कहा, ‘मेरे दिन की शुरूआत सुबह आठ बजे होती है और दो घंटे के ब्रेक के साथ शाम छह बजे तक अभ्यास करती हूं. रविवार को विश्राम का दिन होता है चूंकि रिकवरी भी जरूरी है.’
उन्होंने कहा, ‘मेरा फोकस लगातार सुधार करने और प्रदर्शन में निरंतरता लाने पर है. पिछले साल मेरा पूरा फोकस ट्रेनिंग पर ही था और यही अनुशासन इस साल भी रहने वाला है.’
