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सोनभद्र. आदिवासी जन जातिय परंपरा से विधायक विजय सिंह गौड़ को दफनाया गया, सैकड़ो की सख्या में मौजूद रहे शुभचिंतक

JK Gupta by JK Gupta
January 9, 2026
in सोनभद्र
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@जेo केo/सोनभद्र…….


— आदिवासी समाज ने अपना गार्जियन को खो दिया है, जल जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ते लड़ते वह सदन तक पहुंचे- अविनाश कुशवाहा


Sonbhadra  । उत्तर प्रदेश के आखिरी विधानसभा 403 दुद्धी से समाजवादी पार्टी के विधायक विजय सिंह गौड़ को मिट्टी में दफन कर दिया गया, वह करीब 72 वर्ष के थे, आठ बार के विधायक और पूर्व में मंत्री भी रह चूके थे, राजकीय सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, दुद्धी के कटौली गांव में विजय सिंह के आवास के समीप ही जन जातीय परम्परा के अनुसार मिट्टी में दफन कर दिया गया, उनके अंतिम दर्शन में भारी संख्या में ग्रामीण, नेता, जन प्रतिनिधि और जिले के अधिकारी उपस्थित रहे। विजय सिंह गौड़ के कद्दावर आदिवासी नेता के रूप में जाने जाते थे।

उत्तर प्रदेश में जून 2024 के विधान सभा उप चुनाव में विजय सिंह गौड़ पुनः आठवी बार विधायक चुने गए, जीत के बाद वह लगातार अस्वस्थ्य रहे, बीते छह माह से लखनऊ के पीजीआई में भर्ती थे, उन्हें किडनी समेत अन्य गंभीर बीमारी थी, बताया जाता है कि बीते तीन माह से कोमा में चले गए, बीते बुधवार की देर रात उन्होंने पीजीआई में ही अंतिम सांस ली, गुरुवार देर रात उनका शव दुद्धी स्थित कटौली गांव पहुंचा था, आज पूरा दिन उनके शुभ चिंतक, समाज के लोग, जन प्रतिनिधि और डीएम एसपी भी अंतिम दर्शन में पहुंचे थे।

बताया जाता है कि आदिवासी जिले में जन जातीय परम्परा के अनुसार उनके शरीर का दाह संस्कार नहीं बल्कि मिट्टी में दफन किया गया है, उनके आवास के समीप ही उनके शरीर को दफनाने की प्रक्रिया पूरी की गई, उससे पहले राजकीय सम्मान के साथ गॉड आफ ऑनर दिया गया।

उनके आवास पर छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री राम विचार नेताम, यूपी के समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव कुमार गौड़, एससी एसटी आयोग उपाध्यक्ष जीत सिंह खरवार, सपा जिलाध्यक्ष, पूर्व विधायक, समेत अन्य सपा नेता, भाजपा नेता और जनप्रतिनिधि के अलावा डीएम एसपी मौजूद रहे ।

राबर्ट्सगंज विधानसभा के पूर्व विधायक अविनाश कुशवाहा का कहना है कि यह एक अपूर्णीय क्षति है, आदिवासी समाज ने अपना गार्जियन खो दिया है, आठ बार के विधायक होने से ही उनके व्यक्तित्व का पता चलता है कि उनके शुभचिंतक और चाहने वाले कितने थे, जल जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ते-लड़ते वह सदन तक पहुंचे, यह एक बहुत बड़ी क्षति है और हम लोगों के बीच गार्जियन के रूप में वह हमेशा रहे जो अब नहीं है।

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