Last Updated:
Kota News : कोटा की स्टार बॉक्सर अरूंधती चौधरी ने नोएडा वर्ल्ड कप बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया. उज्बेकिस्तान की प्रतिद्वंदी को हराते हुए उन्होंने सीनियर वर्ग में अपना पहला इंटरनेशनल गोल्ड जीता. गंभीर इंजरी के बाद उनकी यह शानदार वापसी युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा बनी है. अब अरूंधती 2026 एशियन गेम्स में स्वर्ण पर नजर रखते हुए तैयारी कर रही हैं.
कोटा. नोएडा में आयोजित वर्ल्ड कप बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कोटा की उभरती स्टार बॉक्सर अरूंधती चौधरी ने स्वर्ण पदक जीतकर एक बार फिर देश का नाम गर्व से रोशन किया है. कोटा महाबली स्पोर्ट्स अकैडमी की प्रतिभाशाली खिलाड़ी अरूंधती ने फाइनल मुकाबले में उज्बेकिस्तान की मजबूत प्रतिद्वंदी को बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए हराया. विदेशी धरती पर तिरंगा लहराने का यह गौरवपूर्ण क्षण न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे देश और विशेषकर कोटा के लिए सम्मान का विषय बन गया. यह उपलब्धि उनकी मेहनत, लगन और निरंतर प्रयासों का परिणाम है, जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाई है.
अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में पहले ही अपनी धाक जमा चुकी अरूंधती यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप में विश्व विजेता रह चुकी हैं और अब तक सात अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुकी हैं. लेकिन इस बार का स्वर्ण उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनके सीनियर वर्ग में पहला अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल है. उनके कोच अशोक गौतम के अनुसार इस मुकाम तक पहुंचने का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा. गंभीर इंजरी के कारण अरूंधती लगभग डेढ़ साल तक किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले पाईं. हाथ की कलाई और पैर के लिगामेंट में फ्रैक्चर होने से वे लम्बे समय तक प्रशिक्षण से दूर रहीं. इसके बावजूद उनकी इच्छाशक्ति और जज्बे ने उन्हें न केवल खेल में मजबूत वापसी कराई, बल्कि स्वर्ण पदक तक का सफर भी तय करवाया.
सीनियर वर्ग में पहली बड़ी सफलता
इस शानदार जीत के बाद कोटा जिला मुक्केबाजी संघ के अध्यक्ष और अरूंधती के पिता सुरेश चौधरी ने अपनी बेटी की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया. उनकी माता सुनीता चौधरी ने भी खुशी जताते हुए कहा कि अरूंधती ने कठिन परिस्थितियों और लगातार संघर्ष के बावजूद अपनी मेहनत से यह सफलता हासिल की है. वर्तमान में अरूंधती भारतीय सेना में हवलदार के पद पर कार्यरत हैं और देश सेवा के साथ-साथ खेल के मैदान में भी भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमका रही हैं. उनकी यह उपलब्धि न केवल परिवार के लिए, बल्कि क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है.
एशियन गेम्स में स्वर्ण पर नजर
अरूंधती चौधरी अब वर्ष 2026 में होने वाले एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने के लक्ष्य की ओर बढ़ रही हैं. उनका मानना है कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और समर्पण के साथ कोई भी खिलाड़ी अपने सपनों को साकार कर सकता है. उनकी हालिया उपलब्धि यह साबित करती है कि मजबूत इरादों के सामने हर बाधा छोटी पड़ जाती है. अरूंधती की यह जीत देशभर के उभरते खिलाड़ियों के लिए उम्मीद और प्रेरणा की नई रोशनी है.

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल… और पढ़ें
