ओबरा/सोनभद्र. @सौरभ गोस्वामी….
__डॉ0 नाहिद को डाक्टरेट की मानद उपाधि से अलंकृत करते आईटीबीपी के डीआईजी विश्वमित्र आनन्द

प्रतिभा न तो सम्पन्नता की विरासत है और न ही उची रसूख रखने वालो का खिलौना । प्रतिभा वह संजीवनी है जिसकी गूंज महलो से लेकर कुटिया तक और संसद से लेकर गाव के गलियारे तक होती है। प्रतिभा में जूनून होती है। मंजिल पाने की सिद्त होती है कुछ कर गुजरने की चाहत भी। प्रतिभा दिन रात अखण्ड अटूट यज्ञ करती हैै। और अपने अस्तित्व का मूल्य अदा करने की कृतज्ञता रखती है।
उत्तर प्रदेश के सूदूर अंचल जिसके विकास की गाथा भले ही 1965 में लिखी जा चुकी हो ऐसे भी क्षेत्र है और ऐसे भी लोग है जो कि उर्जा के प्रकाश से दूर है ही साथ ही शिक्षा भी उनसे कोसो दूर है। आधुनिक शिक्षा और अच्छे स्कूलो में बच्चे का दाखिला जहा उनके लिये सपना और प्रताडना बन कर रह गया वही फीस के अभाव में आये दिन बच्चो का नाम काटे जाने की विढमबना कही न कही महानगर से इस अंचल में आयी एक ब्याहता को टीसता रहता था।
कुछ कर गुजरने अपने अन्दर प्रतीभा की अंगडाई के आवेग को महसूस कर एक ग्रहणी ने इस विसगतियो का खात्मा करने के लिये अपने परिवार से विद्रोह कर स्कूल खोलने का निर्णय लिया। कालांतर में इस आधुनिक स्कूल की गुंज दिल्ली इस संदेश के साथ पहुची कि इस स्कूल में सर्वोच्च और आधुनिक शिक्षा पद्धति के साथ फीस के अभाव में किसी बच्चे का नाम नही काटेगें।
इस प्रण के साथ शुरू की गयी इस स्कूल की सोहरत फ्रैकफोर्ड इण्टरनेशनल युनीवर्सिटी तक पहुच गयी और अन्तर्राष्टीय स्तर एक फे्रकफोर्ड अन्र्तराष्ट्रीय विश्वविधालय से हेलो स्कूल आफ एक्सीलेंस की प्रधानाचार्य नाहिद अख्तर को मानद उपाधि से सम्मानित करने का न्योता मिला। अंतत शनिवार को दिल्ली स्थित एक पांच सितारा होटल में अप्रतिम प्रतिभा की धनी नाहिद अख्तर को एकेडमिक वस्त्र व एकेडमिक हुड में विधिवत सम्मान के साथ मुख्य अतिथि भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस के डीआईजी विश्वमित्र आनन्द व युनिवर्सीटी डीन राजीव मिश्रा ने डाक्टरेट की मानद उपाधि से अलंकृत कर डा नाहिद खान की उपाधि प्रदान की।
उस समय तालिया े की गूंज के बीच डा नाहिद अख्तर की विशेषता बताते हुये उदघोषणा की गयी कि उन्होने शिक्षा को प्राथमिकता दी ब्यवसयीकरण नही। साथ ही उल्लेख किया गया कि इन्होने पढाई में रचनाशीलता को प्रधानता दिया आधुनिक पद्धति का प्रयोग भी किया ताकि बच्चे खेल खेल में आसानी ब्यवाहरिक ज्ञान का अर्जन कर सके । पढाई में रचनाशीलता के कारण बच्चो को पढाई बोझ नही लगती ।
इस अवसर पर गलोगोटिया विश्वविध्यालय के डीन राजीव मिश्रा, सवोच्च न्यायलय के अधिवक्ता एव समाजवेसी उधला जगन, आकृति आदि अलावा भारी संख्या में बुद्धिजीवियो और रिसर्च स्कालरो की उपस्थिति रही।