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डाला. शख्याल की मधुरता और कथक की थिरकन से मंत्रमुग्ध हुए दर्शक

JK Gupta by JK Gupta
October 20, 2025
in सोनभद्र
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डाला/सोनभद्र. @गुड्डू मिश्रा….


__तेजस्विनी के रागों और अमृत के तालों ने किया शास्त्रीय शाम को अविस्मरणीय

__स्थापना दिवस पर राग, ताल और नृत्य की त्रिवेणी से सजा अचलेश्वर महादेव संगीत समारोह

श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर के 58वें स्थापना दिवस पर रविवार को मंदिर फाउंडेशन के बैनर तले रविवार की शाम संगीत समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभांरभ मंदिर के संस्थापक महंत पंडित मुरली तिवारी के साथ नपं अध्यक्ष फुलवंती गोड़ ,मंजुल प्रकाशन के प्रबंधक सम्पादक सुशांत झा मानस परिवार समिति के अध्यक्ष नीरज पाठक व रमाशंकर पाण्डेय, विकाश मिश्र ने दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यक्रम नवोदित तबला वादक आनंद प्रकाश पाण्डेय के तबला सोलो से प्रारम्भ हुआ, तीन साल की उम्र से बनारस घराने के सिद्धहस्त तबला वादक व गुरू पण्डित छोटे लाल मिश्र से गुरू शिष्य परम्परा में सिख रहे आनंद नें तबले पर तीन ताल में कायदा, बाँट, व टुकड़ा तनिक सकूँचाते हुए पर बड़े सधे अंदाज में प्रस्तुत किया। दूसरी प्रस्तुति युवा पर बेहद प्रतिभाशाली खयाल गाईका सुश्री तेजश्विनी दिगंबर वर्णनेंकर नें गंभीर व बेहद जटिल राग शुद्ध कल्याण में अति विलंबित “तुम बिन कौन खबरिया ले” से अपना गायन आरम्भ किया।

आपके राग विस्तार में गमकार, मीड और तान का उत्कृठ उपयोग सुनने को को मिला, गायन में एक आसाधारण शक्ति और भावनात्मक गहराई जो सामान्य श्रोता को ध्यानस्थ कर गई। मध्य लय तीन ताल में “निंदरिया तू काहे न आए”गाया ततपश्चात राग तिलक कामोद में मध्यलय झपताल में “तीरथ तो सब करे व द्रुत एक ताल में तराना गाया। किराना घराने की उत्कृठ गायकी का सम्पूर्ण निर्वहन तेजश्विनी के गायन में सुनने को मिला, आपके साथ तबले पर ललित कुमार व हारमोनियम पर मोहित साहनी नें संगत किया।

कथक नर्तक अमृत मिश्र नें अपने नृत्य का आरम्भ विश्वनाथ स्तुति “आदि शम्भू” से किया। भारत के दो सबसे महत्वपूर्ण घराने बनारस व लखनऊ के सिद्धहस्त कथक कलाकर गुरू पण्डित माता प्रसाद व पण्डित ओम प्रकाश से गुरू शिष्य परम्परा में घराने की बारिकियों को सीखा साथ ही बी एच यू से प्रोफेसर विधि नागर के अंडर में पी एच डी कर उनकी संस्था रुद्राक्षी फाउंडेशन के साथ देश विदेश में अपनी प्रस्तुति दे रहें हैं।

आपने पारम्परिक तीन ताल जिसमे टुकड़े, तिहाई, परन इत्यादि का समावेश था अमृत के नृत्य में ताल पक्ष के साथ-साथ अभिनय का भी विशेष महत्व देखने को तब मिला जब द्रुत लय में गत भाव जिसमे चारो भाइयों ( राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघन) के स्वरूप को अपने भाव नृत्य के माध्यम से किया व प्रत्येक स्वरूप को देख कर श्रोताओं नें नाम बताया व जय श्री राम सेनगर गुंजायमान हो गया. आपके साथ पढ़न्त पर अनंत मिश्र सीतार पर रोहित चटर्जी व तबले पर बेहद प्रतिभाशाली कलाकर आंनद मिश्र नें संगत किया।

कार्यक्रम का कुशल संचालन किरण तिवारी नें किया व धन्यवाद ज्ञापन फाउंडेशन के सचिव चंद्र प्रकाश तिवारी नें किया। इस दौरान पंडित ओम प्रकाश तिवारी, धनंजय सिंह राकीम, जे एन तिवारी,, डॉ विशेषमणि पांडेय, जगदीश तिवारी संतोष त्रिपाठी, सूर्य प्रकाश तिवारी संजय पांडेय गिरीश, इंदु यादव, कुमुद तिवारी आदि उपस्थित रहे।

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