डाला/सोनभद्र (गुड्डू तिवारी)……
— ग्रामीणों ने कहा समस्यायों का समाधान नहीं तो वोट नहीं

बिल्ली मारकुंडी ग्राम पंचायत क्षेत्र के बऊली टोला में बिजली, पानी, सड़क जैसी आवश्यक सुविधाओं की कमी से जूझ रहे ग्रामीणों ने शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन किया उन्होंने कहा कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आगामी चुनाव में वोट नहीं देंगे।
ओबरा विधानसभा क्षेत्र में स्थित बऊली टोला सदर व ओबरा विधानसभा क्षेत्र की सीमा पर है जो चोपन विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बिल्ली मारकुंडी का एक टोला है आजादी के इतने वर्षों बाद भी उक्त गांव के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित है शौचालय आवास जैसी कई जिला प्रशासन की योजना इन तक नहीं पहुंच पाती है।सड़क नहीं होने के कारण उक्त टोले में एम्बुलेंस नही पहुंच पाती हैं। ग्रामीण काशी गोंड़, भुवनेश्वर, फूल कुमारी, चंद्रावती देवी ने बताया कि हम सभी अनुसूचित जनजाति के लोग इस गांव के मुल निवासी हैं जहां सैकड़ो लोग निवासरत हैं ।
विकास के इस दौर में भी हम सभी ग्रामीण बिजली, सड़क, पानी शौचालय ,आवास जैसी सुविधाओं से वंचित हैं जबकि यह डाला नगर पंचायत व बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र से सटा हुआ है गांव से महज कुछ दूरी पर चारों ओर विद्युत की रोशनी दिखाई देती है लेकिन हम सभी अपने गांव में बल्ब की रोशनी से दूर अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। समस्याओं को लेकर हम ग्रामीण ओबरा विधायक व प्रदेश सरकार के समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड़ के आवास पर भी गए उन्हें अवगत कराया
लेकिन केवल आश्वासन मिला ।ग्राम प्रधान हो या कोई जनप्रतिनिधि हम लोगों की समस्याओं को सुनने इस टोले में कभी नहीं आता है। चुनाव के समय प्रत्याशी आते हैं और बड़े-बड़े वादे करके जाते हैं चुनाव बीतने व जीतने के बाद सब भूल जाते हैं इसलिए हम ग्रामीणों ने इस बार यह निर्णय लिया है कि जब तक हमारी समस्याओं का समाधान नहीं होगा तब तक आगामी चुनावों में हम मतदान नहीं करेंगे।
मानकुंवर, रीता देवी ने कहा कि सुविधाएं नहीं तो वोट नहीं, बिजली-पानी-सड़क रोज़मर्रा की पीड़ा को गहराई की भावनाओं के साथ साझा करते हुए कहा की हमारे टोले में बिजली नहीं है। बरसात में पूरा रास्ता कीचड़ और पानी में डूब जाता है, बच्चे गिर-गिरकर स्कूल जाते हैं। कई बार तो उनके जूते कीचड़ में फंस जाते हैं और उनके कपड़े तक गंदे हो जाते हैं।बीमार पड़ने पर अपने बुजुर्ग और बच्चों को चारपाई पर उठाकर दूर सड़क तक ले जाना पड़ता है।
एंबुलेंस टोले में नहीं आती। हमारी झोपड़ियां भी आधी टूटी हैं, छत से पानी टपकता है, बच्चों को सोते समय पानी और ठंड से डर लगता है। हम गरीब हैं, लेकिन इंसान हैं, हमारी ज़रूरतें कम नहीं हैं। विद्युतीकरण नहीं होने से जंहा बच्चों की पढ़ाई लिखाई ठीक से नहीं हो पा रही है वंही अंधेरे में विषैले जीव जंतुओं का भी हमेशा डर सताता रहता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आदिवासी समाज अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए आंदोलन को और तेज करेगा उन्होंने जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए समस्याओं का समाधान कराए जाने की मांग की है।
इस दौरान नन्हकी देवी ,सुमित्रा ,पार्वती देवी, नीतू ,कविता ,राजमती, राम सुमेर, भगवान दास ,सोनू ,पूनम ,लीलावती, छोटे लाल गोंड़ आदि मौजूद रहे।