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भारतीय टेनिस प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है. देश के होनहार खिलाड़ियों ने 32 साल बाद किसी यूरोपियन टीम को विदेश में हराया है. सुमित नागल और दक्षिणेश्वर सुरेश ने कमाल कर दिया. नागल ने रिवर्स सिंगल मुकाबला जीतकर भारत को ऐतिहासिक जीत दिला दी. इसके साथ ही 1993 का वो लम्हा याद आ गया जब लिएंडर पेस और रमेश रामकृष्णन ने फ्रांस को विदेश में हराकर इतिहास कायम किया था.
सुमित नागल और दक्षिणेश्वर ने लहराया तिरंगा. नॉन प्लेइंग कप्तान रोहित राजपाल ने आर्यन शाह की जगह दक्षिणेश्वर सुरेश (Dhakshineswar Suresh) पर भरोसा जताया और चेन्नई के इस लंबे कद के खिलाड़ी ने उन्हें निराश नहीं किया. दक्षिणेश्वर सुरेश को पहले रिजर्व में रखा गया था लेकिन बाद में कप्तान ने इस खिलाड़ी को पहले ही मुकाबले में उतार दिया जो उसका डेब्यू मैच था. 25 साल के सुरेश ने डेविस कप ग्रुप 1 में स्विट्जरलैंड के ऊंची रैंकिंग वाले जेरोम काइम को सीधे सेटों में हराकर भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई.सुरेश ने 155वीं रैंक वाले काइम को एकल मुकाबले में 7-6 (4) 6-3 से शिकस्त दी. एटीपी रैंकिंग में दक्षिणेश्वर 626वें स्थान पर हैं, लेकिन उनका खेल इस कम रैंकिंग से कहीं बेहतर था.उन्होंने नेट का शानदार इस्तेमाल कर अपने प्रतिद्वंद्वी को परेशान किया.

सुमित नागल और दक्षिणेश्वर ने लहराया तिरंगा.
A feeling that cannot be described in words ❤️🇮🇳
What a team effort to take India to its away Davis Cup victory in Europe in 32 years. Proud of the whole team 💪🏽 pic.twitter.com/QZ67Yw2kxM
