ये अवध के नवाब वाजिद अली शाह थे. जिन्होंने एक हिजड़े यानि ख्वाजासरा से विधिवत शादी रचाई. उन्होंने अपने जीवनकाल में ‘राहस’ (नृत्य-नाटक) नामक एक नई नाट्य शैली का विकास किया, जिसमें पुरुष और महिला दोनों भूमिकाएं ज्यादातर पुरुषों या हिजड़ों द्वारा ही निभाई जाती थीं.
सुडौल शरीर, अप्सरा जैसा रूप
वजीर का शरीर सुडौल था. चेहरे पर नाजुकता और स्त्रीवत सौंदर्य था. आंखों में गजब की कशिश. जब वह मंच पर नृत्य करता, तो लगता मानो कोई अप्सरा वहां आ गई हो. उसकी हर भाव भंगिमा बिजलियां गिराती थी.

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और कैसे नवाब का दिल उसके लिए धड़कने लगा
कहानी उस शाम शुरू होती है, जब लखनऊ के कैसरबाग पैलेस में एक भव्य ‘राहस’ का आयोजन हुआ. महल की रोशनियां चारों तरफ़ जगमगा रही थीं. हवा में खुशबू और संगीत की लहरें तैर रही थीं. उस रात का नाटक एक दुखांत प्रेम कहानी पर आधारित था. वजीर ने नायिका की भूमिका निभाई. जैसे ही संगीत का सुर तेज़ हुआ, वजीर ने नृत्य के जरिए अपने अद्भुत अभिनय से उस सीन को मानो जीवंत ही कर दिया.
नवाब वाजिद अली शाह अपने सिंहासन पर बैठे हुए थे. वह उठकर खड़े हुए. वह भी मंत्रमुग्ध से रह गए. उनकी आंखों में भी आंसू थे. उस रात के बाद, नवाब का दिल वजीर के लिए धड़कने लगा.
उलेमाओं ने शादी का विरोध किया
धूमधाम से हुई शादी
ये विवाह फिर बहुत धूमधाम से हुआ. नवाब ने अपनी इस दुल्हन को “महक परी”का खिताब दिया. उसे शाही हरम में ऊंचा दर्जा दिया. उसे कीमती जेवरात और वस्त्रों से नवाजा गया.

ये घटना ऐतिहासिक अभिलेखों में दर्ज है. उस समय के ब्रिटिश रेजिडेंट और अन्य अधिकारियों ने अपनी रिपोर्टों और संस्मरणों में नवाब के इस “अनोखे” विवाह का उल्लेख किया है, जिसे वे अक्सर हैरानी और तिरस्कार के साथ देखते थे. भारतीय इतिहासकार विलियम नाइटन जैसे इतिहासकार ने भी अपनी किताब में इसका जिक्र किया है.
अफ्रीकी महिलाओं को गार्ड बनाया, उनसे शादी भी की
300 से ज्यादा शादियां रचाईं
हां, नवाब वाजिद अली शाह ने अपनी कई अफ्रीकी महिला गार्डों से शादी भी रचाई. ये एक ऐतिहासिक तथ्य है जिसकी पुष्टि कई विद्वानों और ऐतिहासिक स्रोतों ने की है. अफ्रीकी महिलाओं की सुंदरता, बल और अनूठे व्यक्तित्व ने उन्हें आकर्षित किया. उनकी 300 से ज्यादा बीवियां बनीं. इसमें अलग अलग जातियों और देशों की महिलाएं शामिल थीं. ब्रिटिश इतिहासकार रोज़ी लेलोंग ने अपनी किताब “फॉर्जाटन स्लेव्स: द अफ्रीकंस इन इंडिया” में इस बात का विस्तार से उल्लेख किया है.
कई विदेशी महिलाएं भी थीं रानी
8 साल की उम्र में महिला सहायक से संबंध बनाया
वाजिद अली शाह अवध के आखिरी नवाब थे. वह साल 1847 में गद्दी पर बैठे. 1856 तक रहे. फिर अंग्रेजों ने उन्हें गद्दी से हटा दिया. सुदीप्ता मित्रा अपनी किताब ‘ ए नवाब एंड ए बेगम’ (A Nawab and A Begum) में लिखती हैं कि वाजिद अली जब 8 साल के थे, तब उस छोटी सी उम्र में पहली बार अपनी एक महिला सहायक के साथ शारीरिक संबंध बनाया. इसके बाद वह अपनी अपनी मां की सहायिका के प्रेम में पड़ गए, जो 35 साल की थी.
इतनी महिलाओं से संबंध बनाए कि खुद भूल गए
18 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते नवाब वाजिद अली का इतनी महिलाओं से संबंध बना कि वह खुद भूल गए. इतिहासकार रोजी लेवलेन जोन्स अपनी किताब ‘द लास्ट किंग इन इंडिया: वाजिद अली शाह’ (The Last King in India: Wajid Ali Shah) में लिखती हैं कि 1857 की क्रांति से पहले नवाब वाजिद अली शाह को अंग्रेजों ने निकाल दिया और उन्हें कलकत्ता के फोर्ट विलियम में रहने को एक बंगला दिया. नवाब ने उस बंगले का नाम ‘सुल्तान खाना’ रखा.
एक साथ 27 बेगमों को तलाक
अंग्रेजी हुकूमत नवाब वाजिद अली शाह को 1 लाख रुपये महीना भत्ता दिया करती थी, लेकिन इस पैसे से उनका काम बहुत मुश्किल से चल पाता था. एक बार नवाब की एक बेगम माशूक महल के बेटे ने अंग्रेजों से शिकायत की कि नवाब उसकी मां को गुजारे के लिए पैसा नहीं देते हैं.
रवि भट्ट अपनी किताब The Life and Times of the Nawabs of Lucknow में लिखते हैं कि अंग्रेजी सरकार ने नवाब वाजिद अली शाह को अपनी बेगम का भत्ता 2500 रुपये महीना बढ़ाने का आदेश दिया. नवाब इस बात से इतने नाराज हुए कि उन्होंने अपनी 27 बेगमों को एक दिन एक साथ तलाक दे दिया. कहा कि उनका खर्च नहीं उठा सकते हैं.

