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नेपाल के पहले तख्तापलट में क्या थी पीलीभीत की भूमिका… जानें तराई में शाह, शाही सरनेम का रहस्य

Admin by Admin
September 10, 2025
in उत्तर प्रदेश
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नेपाल के पहले तख्तापलट में क्या थी पीलीभीत की भूमिका… जानें तराई में शाह, शाही सरनेम का रहस्य
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Last Updated:September 10, 2025, 13:19 IST

Gen-Z Protest In Nepal : नेपाल के पहले तख्तापलट की कहानी सिर्फ काठमांडू तक सीमित नहीं थी, इसमें भारत के तराई इलाके, खासकर पीलीभीत की भी अहम भूमिका रही. यहां बसे शाह और शाही सरनेम वाले परिवारों का इतिहास सीधे न…और पढ़ें

पीलीभीत : नेपाल इन दिनों गहरे राजनीतिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है. Gen-Z की अगुवाई में भड़के प्रदर्शन ने देश की सियासत को हिला कर रख दिया है. बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया पर बैन और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई जानकार बांग्लादेश जैसे हालात की आशंका जता रहे हैं. देखते-देखते प्रदर्शन उग्र हुआ और नेपाल के राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री को इस्तीफा देकर देश छोड़कर भागना पड़ा. हालांकि नेपाल के सभी बड़े नेता कहां शरण लेंगे इसको लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है.

राजनैतिक जानकारों के अनुसार पाकिस्तान की तरह ही नेपाल का इतिहास राजनीतिक अस्थिरता और तख्तापलट की घटनाओं से भरा रहा है. नेपाल में तख्तापलट की शुरुआत 1790 में हुई थी जब गोरखा सेना ने डोटी साम्राज्य पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया था. इसके बाद 1951 में राणा शासन के अंत के बाद लोकतंत्र की शुरुआत हुई, लेकिन स्थिरता नहीं आ सकी. 1960 में राजा महेंद्र ने संसद भंग कर पंचायती व्यवस्था लागू की. 1990 में जनआंदोलन से बहुदलीय लोकतंत्र लौटा, परंतु 2001 का शाही नरसंहार और उसके बाद राजा ज्ञानेन्द्र का तख्तापलट फिर संकट ले आया. 2006 के जनआंदोलन ने राजतंत्र को समाप्त कर गणतंत्र का मार्ग खोला.

कब हुआ था नेपाल में पहली बार तख्तापलट
बार-बार हुए इन तख्तापलटों ने नेपाल को अस्थिर किया और राजनीतिक नेतृत्व पर अविश्वास गहराया. गौरतलब है कि 18वीं शताब्दी में हुए तख्तापलट के दौरान पीलीभीत की अहम भूमिका रही थी. दरअसल, उत्तर प्रदेश का पीलीभीत जिला नेपाल के पश्चिमांचल से सीमा साझा करता है. वैसे तो यहां कोई ऐसा बॉर्डर नहीं है जिससे आम नागरिक नेपाल में प्रवेश कर सकें, मगर सीमावर्ती गांवों के लिए सीमाएं खुली रहती हैं. वहीं यह पूरी ही सीमा, खुली सीमा है. ऐसे में इस सीमा का इस्तेमाल सदियों से किया जाता है.

प्रतिभूति शाह ने ली थी भारत में शरण
लोकल 18 से बातचीत के दौरान वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री 18वीं शताब्दी के अंत के दौरान गोरखा साम्राज्य ने नेपाल के अलग-अलग राज्यों पर क़ब्ज़ा करना शुरू कर दिया था. इसी कालखंड में पश्चिमी नेपाल में डोटी राज्य में शाह परिवार का साम्राज्य हुआ करता था. यह साम्राज्य भी गोरखा के आक्रमण में पराजित हो गया था. ऐसे में वर्ष 1790 में गोरखा सेना ने डोटी साम्राज्य पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया जिसके बाद तत्कालीन राजा पृथ्वीराज शाह को अपना राज छोड़कर भागना पड़ा. निष्कासन के बाद प्रतिभूति शाह ने अपने परिवार और कुछ वफ़ादार साथियों के साथ भारत में शरण लेने का निर्णय लिया.

समय और सत्ता के आधार पर बदले के समीकरण
जिसमें तत्कालीन रामपुर राज्य के नवाब फैजल ख़ान ने उन्हें राजनीतिक शरण दी और पीलीभीत इलाक़े में रहने की अनुमति दी. वही उनके और उनके परिवार के लिए रहने और सुरक्षा की संपूर्ण व्यवस्था की. प्रथ्वीपति शाह के बाद उनके वंशज यहीं बस गए और उन्होंने धीरे धीरे स्थानीय समाज में अपनी जगह बना ली. उनके वंशज आज भी पीलीभीत और आस पास के क्षेत्रों में निवास करते हैं जिन्हें शाह, शाही के नाम से जाना जाता है. अमिताभ बताते हैं कि भारत और नेपाल के बीच परस्पर संबंध सदियों पुराने हैं हालाँकि समय और सत्ता के आधार पर यह समीकरण बदलते रहे हैं.

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Location :

Pilibhit,Uttar Pradesh

First Published :

September 10, 2025, 13:19 IST

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