डाला/सोनभद्र (गुड्डू तिवारी)…..

शुद्धता का ध्यान रखते हुए भंडारे में प्रसाद बनाए जाने वाले बर्तन की उपलब्धता सुनिश्चित कराए जाने को लेकर मंगलवार की शाम हनुमान सेवा समिति द्वारा मंदिर परिसर में एक बैठक आयोजित हुई। इसके बाद प्रत्येक मंगलवार को होने वाला संगीतमय सुंदरकांड पाठ किया गया।
नगर व आसपास दूर्गा पूजा, कृष्ण जन्माष्टमी, हनुमान जन्मोत्सव समेत होने वाले यज्ञ अनुष्ठान आदि भंडारे में सभी भक्तों के मन में यह भाव उत्पन्न होता है कि प्रसाद बनाने में जो बर्तन प्रयोग किया जाए वह पूरी तरह शुद्ध व सात्विक हो ।वैसे तो टेंट हाउस से आसानी से बर्तन मिल जाता है लेकिन वह बर्तन हर प्रयोजनों में जाते हैं इसलिए माना यह जाता है कि उस बर्तन में मांसाहारी व शाकाहारी दोनों प्रकार के भोजन बनाए जाते हैं। भंडारे में बनने वाले भोजन का भगवान के समक्ष भोग लगते ही उस भोजन को प्रसाद कहा जाता है लिहाजा बर्तनों की शुद्धता व आसानी से उपलब्धता के लिए सर्वसम्मति से जय हनुमान सेवा समिति के सभी भक्तों द्वारा निर्णय लिया गया कि आपसी सहयोग व सहमति बनाकर भंडारे में प्रयोग होने वाले बर्तनों की खरीदी होगी।
जिसके रखरखाव व संचालन की जिम्मेदारी समिती के संरक्षक राजवंश चौबे को सौंपे जाने पर सहमति जताई गई। पंडित ओमप्रकाश तिवारी व मनोज शुक्ला ने कहा कि परोपकार से बढ़कर कुछ नहीं है भंडारा न केवल भोजन प्रदान करने का माध्यम है, बल्कि यह हमारी धार्मिक आस्था, सामाजिक सेवा और मानवीय एकता का जीवंत प्रतीक भी है मंदिर में यह देव प्रसाद कहलाता है। इस दौरान अखिलेश कुमार पांडेय , कृपाशंकर चौबे,संजय मित्तल ,संतोष त्रिपाठी, मुकेश जैन ,दिनेश जैन, जगदीश तिवारी, नीरज पाठक,सुधीर सिंह, सुदर्शन मिश्रा, शरत चंद पांडेय, आदि मौजूद रहे।
