इंसानी सभ्यता में चंद्रमा खूबसूरती और मोहब्बत का प्रतीक है, इसलिए यह सदियों से कवियों और कलाकारों का ध्यान खींचता रहा है. चांद पर बेहतरीन हिंदी गाने लिखे गए, जिनमें से एक गाना फिल्म ‘चौदहवीं का चांद’ का टाइटल ट्रैक है. यह पंक्ति उर्दू शायरी में भी बहुत इस्तेमाल हुई है. इसे जब शकील बदायूं ने अपने गीत में पिरोया और मोहम्मद रफी ने गाया, तो यह अमर हो गया. गाने ‘चौदहवीं का चांद हो’ को गुरु दत्त और वहीदा रहमान पर फिल्माया गया है, जिसके एक शॉट को भारतीय सिनेमा का सबसे ‘रोमांटिक मोमेंट’ माना जाता है, जिसमें वहीदा रहमान की आंखों में लालीमा छाई नजर जाती है और गुरु दत्त उनके प्रेम में डूबे दिखते हैं. गाने में लीड सितारों के असली जज्बात बयां हुए हैं, जो असल जिंदगी में भी प्रेमी-प्रेमिका थे. मोहम्मद रफी को गाने के लिए बेस्ट सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.
