घोरावल/सोनभद्र. @विजय अग्रहरी….

घोरावल तहसील मुख्यालय के सभा कक्ष में मंगलवार को फाइलेरिया उन्मूलन संबंधी प्रोग्राम के अंतर्गत एसडीएम आशीष त्रिपाठी की अध्यक्षता में बैठक की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा प्रेजेंटेशन के माध्यम से फाइलेरिया उन्मूलन, फाइलेरिया के कारण, फाइलेरिया से होने वाली समस्या, फाइलेरिया का इलाज एवं फाइलेरिया समाज के लिए कितना खतरनाक है, इत्यादि विषयों के संबंध में जानकारी दी।
बताया गया कि फाइलेरिया कृमि से होने वाला एक रोग है जो लाईइलाज है। फाइलेरिया होने के बाद एवं लक्षण प्रकट होने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है। फाइलेरिया की दवाई साल में एक बार एवं लगातार 3 वर्ष खाने से और पूरा समाज एक साथ खाए, तो इस पद्धति से फाइलेरिया उन्मूलन हो सकता है ।भारत सरकार ने फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 2027 वर्ष को लक्ष्य वर्ष के रूप में घोषित किया है। घोरावल तहसील के कुछ गांव में फाइलेरिया की दवाई खाने को लेकर जनसमुदाय में प्रतिरोध बना हुआ है।
इसके संबंध में लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उन गांव में लोगों को जागरूक करने हेतु अभियान चलाया जाएगा। सीएचसी अधीक्षक डॉ नरेंद्र सरोज ने बताया कि फाइलेरिया का वाहक कुलेक्स मच्छर होता है जब यह मच्छर एक व्यक्ति को काटता है और उस व्यक्ति को यदि फाइलेरिया की बीमारी होती है तो दूसरे व्यक्ति में भी मच्छर के माध्यम से ही बीमारी फैल जाती है ।
इस प्रकार फाइलेरिया हमारे समाज के लिए अत्यंत घातक बीमारी है। इस मौके पर एसीएमओ गुलाब शंकर यादव, बीईओ अरविंद पटेल, सीडीपीओ मुकेश कुमार, लेखपाल, सेक्रेटरी इत्यादि मौजूद रहे।