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Pilibhit News: नागरिकों की सहुलियत के लिए बड़ी-बड़ी परियोजनाओं की स्वीकृति देकर करोड़ों की रकम भी दी जाती है. मगर निचले स्तर पर इन करोड़ों की परियोजनाओं की किस कदर बेकद्री होती है, इसका जीता जागता उदाहरण टनकपुर…और पढ़ें
करीब छह महीने पहले टनकपुर और मैलानी रेलखंड पर तमाम अड़चनों के बाद दोनों ओबर ब्रिज बनाकर तैयार कर दिए गए. दोनों ओवरब्रिज का निर्माण पूरा होने के बाद इस नवनिर्मित बाईपास पर असम हाईवे की ओर से पीलीभीत-माधोटांडा रोड तक वाहनों का आवागमन शुरू कर दिया गया. मगर दूसरे हिस्से में खड़े पेड़ों के चलते बाईपास को शुरू नहीं किया गया और टनकपुर हाईवे की ओर से इस नवनिर्मित बाईपास को पत्थर लगाकर बंद कर दिया गया. हालांकि सामाजिक वानिकी प्रभाग से अनुमति मिलने के बाद बीते जून में बाईपास के संचालन में रुकावट बने पेड़ों का कटान करवा दिया गया. अब नवनिर्मित बाईपास से जल्द ही वाहनों का आवागमन शुरू हो जाएगा और शहर को भी जाम से छुटकारा मिल सकेगा. मगर, जिम्मेदार 116 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी इस नवनिर्मित बाईपास को शुरू कराना ही भूले बैठे हैं.
शिकायत ने खोली पोलपट्टी
इधर, नवनिर्मित बाईपास का संचालन शुरू न होने पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवम कश्यप बीते 24 जून को तत्कालीन एसडीएम सदर को पत्र सौंपा था. इस पर उन्होंने पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता को पत्र भेजकर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए सप्ताह भर में आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे. मगर पीडडब्ल्यूडी की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई. जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता ने जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत की थी. इस मामले में अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी द्वारा लगाई गई आख्या के अनुसार पीडब्ल्यूडी द्वारा इस बाईपास पर चार वर्ष पूर्व कार्य पूरा कर लिया गया है. उक्त मार्ग पर पड़ने वाले दो ओवरब्रिज का निर्माण कार्य सेतु निगम द्वारा किया जा रहा है. जबकि राज्य सेतु निगम का कहना है कि दोनों ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा कर बीते मार्च ही पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर भी कर दिए गए हैं. इस बाईपास पर करीब 30-40 मीटर के हिस्से में काम अधूरा पड़ा हुआ है.जिसे पीडब्ल्यूडी को पूरा करना है. फिलहाल मामला जो भी हो, 116 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद जनपदवासियों को इस नवनिर्मित बाईपास का फायदा कब मिलेगा, इसका जवाब किसी भी जिम्मेदार के पास नहीं है.

