चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है. चैत्र नवरात्रि की दुर्गा अष्टमी और महानवमी के दिन हवन करने का विधान है. हवन में कुछ विशेष सामग्री की आहुति देते हैं, जो देवी और देवताओं को प्राप्त होते हैं. इससे नवग्रह भी शांत होते हैं, उनसे जुड़े दोष और नकारात्मक प्रभाव भी दूर होते हैं. हवन में देव वृक्ष जैसे आम, आंवला की लकड़ियों के साथ औषधियां भी डाली जाती हैं, जिनकी आहुति देने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और आसपास की हवा शुद्ध होती है. इस चैत्र नवरात्रि में आपको भी अपने घर पर हवन करना है तो उसकी सामग्री की वयवस्था करनी जरूरी है. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं चैत्र नवरात्रि की हवन सामग्री, मुहूर्त और मंत्र के बारे में.
चैत्र नवरात्रि हवन 2025 तारीख
वैसे तो आप चैत्र नवरात्रि के प्रत्येक दिन प्रतिपद से नवमी तक हवन कर सकते हैं, लेकिन दुर्गा अष्टमी और महानवमी को नवरात्रि का हवन करते हैं. इस साल दुर्गा अष्टमी 5 अप्रैल दिन शनिवार और महा नवमी 6 अप्रैल दिन रविवार को है.
चैत्र नवरात्रि हवन 2025 मुहूर्त
दुर्गा अष्टमी और महा नवमी के दिन पूजा के बाद हवन कर सकते हैं. दुर्गा अष्टमी पर अभिजीत मुहूर्त 11:59 ए एम से 12:49 पी एम तक है. दुर्गा अष्टमी का हवन इस मुहूर्त में कर सकते हैं. वहीं महा नवमी को पूरे दिन रवि योग, रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं. पूजा के बाद आप कभी भी हवन कर सकते हैं.
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चैत्र नवरात्रि 2025 हवन सामग्री
1. एक हवन कुंड, फूल, फूलों की माला, 5 प्रकार के फल
2. काला तिल, अक्षत्, गाय का घी, जौ, रोली, पान के पत्ते, सुपारी, इलायची, लौंग
3. मिठाई, शहद, शक्कर, जटावाला एक नारियल, सूखा नारियल, कपूर, माचिस, लोभान
4. चंदन, आम, बेल, पीपल और नीम की सूखी लकड़ी
5. गुग्गल, मुलैठी की जड़, अश्वगंधा, ब्राह्मी, पलाश और गूलर की छाल
6. अगरबत्ती, धूप, दीप, गंगाजल, पंचामृत
7. रक्षासूत्र या कलावा, हवन सामग्री के पैकेट, हवन की पुस्तिका
नवरात्रि हवन मंत्र
ओम आग्नेय नम: स्वाहा
ओम गणेशाय नम: स्वाहा
ओम गौरियाय नम: स्वाहा
ओम नवग्रहाय नम: स्वाहा
ओम दुर्गाय नम: स्वाहा
ओम महाकालिकाय नम: स्वाहा
ओम हनुमते नम: स्वाहा
ओम भैरवाय नम: स्वाहा
ओम कुल देवताय नम: स्वाहा
ओम स्थान देवताय नम: स्वाहा
ओम ब्रह्माय नम: स्वाहा
ओम विष्णुवे नम: स्वाहा
ओम शिवाय नम: स्वाहा
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ओम जयंती मंगलाकाली, भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवाधात्री स्वाहा स्वधा नमस्तुति स्वाहा.
ओम ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु स्वाहा.
ओम गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवा महेश्वर: गुरु साक्षात् परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा.
ओम शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्थार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते.
ओम पूर्णमद: पूर्णमिदम् पुर्णात पूण्य मुदच्यते, पुणस्य पूर्णमादाय पूर्णमेल विसिस्यते स्वाहा.
ये कुछ मंत्र हैं, जिनका उपयोग हवन के समय किया जाता है. यदि आपको हवन करना है तो किसी अच्छे पुरोहित की मदद ले सकते हैं, जो विधि विधान से इसे संपन्न करा सके.