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Fish improve children behavior: अगर आपका बच्चा ज्यादा बदमाशी कर रहा है, सही तरीके का व्यवहार नहीं कर रहा है तो वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में पाया है कि इसके लिए सप्ताह में दो दिन इ चीज को खिलाना चाहिए. इससे बच…और पढ़ें
बच्चों के व्यवहार का सीधा संबंधन खान-पान से.
Fish improve children behavior: बच्चे मासूम ही अच्छे होते हैं. अगर वह शैतानी करने लगे तो उसपर प्यार कम आता है. अपने मां-बाप के लिए तो ऐसे बच्चे सही हो सकते हैं लेकिन बाहर की दुनिया में उसे गलत समझा जाता है. ऐसे में बच्चे का व्यवहार और संस्कार अच्छा होना ही चाहिए. अगर बच्चे का व्यवहार सही नहीं है तो उसे व्यवहार की तालीम देनी चाहिए. हालांकि एक अध्ययन में पाया है कि बच्चे का व्यवहार खान-पान से भी तय हो सकता है. इसलिए यदि बच्चे का व्यवहार सही नहीं है तो उसे सप्ताह में दो दिन एक चीज जरूर खिलाना चाहिए. इससे बच्चे का व्यवहार सही हो सकता है. यह चीज है मछली. स्टडी के मुताबिक अगर बच्चे की डाइट में दो दिन मछली दे दी जाए तो बच्चे का व्यवहार बदल सकता है.
हर बच्चे को दो दिन मछली खिलाना चाहिए
यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि अगर कोई बच्चा सप्ताह में दो दिन भी मछली का सेवन करता है तो वह बहुत ही संस्कारी होता है. समाज के साथ उसका सामंजस्य बेहतर होता है. ऐसा बच्चा दयालु भी होता है. इस अध्ययन के बाद शोधकर्ताओं ने माता-पिता से गुजारिश की है वे अपने बच्चे को फिश जरूर खिलाएं. इस अध्ययन की प्रमुख लेखक डॉ. कैरोलिन टेलर ने बताया कि हमारे अध्ययन में यह स्पष्ट हो गया है कि मछली का सेवन बच्चे के व्यवहार को अच्छा बनाता है. इसलिए हमें अपने बच्चों को मछली खिलाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अध्ययन में यह पाया गया कि जो बच्चे मछली नहीं खाते हैं वे ज्यादा सेल्फिश और मतलबी होते हैं.
उम्र बढ़ने पर और भी व्यवहार हो गया खराब
अध्ययन के मुताबिक मछली में ओमेगा 3 फैटी एसिड, सेलेनियम और आयोडीन होता है. ये सारे पोषक तत्व ब्रेन डेवलपमेंट और संज्ञानात्मक फंक्शन के लिए बहुत अच्छे होते हैं. इस अध्ययन में 6000 बच्चों के व्यवहार और उसके खान-पान पर परीक्षण किया गया था. टीम ने सीफूड डाइट और दिमागी क्षमता के बीच संबंधों की पड़ताल की. इनमें 28.9 प्रतिशत बच्चे सप्ताह में दो दिन से ज्यादा मछली का सेवन करते हैं. वहीं 63 प्रतिशत बच्चे बहुत कम मछली खाते थे. वहीं 3 प्रतिशत बच्चे मछली खाते ही नहीं थे. अध्ययन के निष्कर्ष में पाया गया कि सात साल के जो बच्चे मछली नहीं खाते थे, उनका व्यवहार बहुत खराब था. वहीं जब ये बच्चे 9 साल के हुए तो और भी ज्यादा रूड हो गए. यानी उनका व्यवहार खराब हो गया. वहीं जो बच्चे सप्ताह में दो दिन से ज्यादा मछली खाते थे उनका व्यवहार बहुत अच्छा था.