संवाददाता@अमिताभ मिश्रा…..
— श्रावण मास में शिव महिमा पर तीन दिवसीय सत्संग में उमड़े श्रद्धालु

श्रावण मास भगवान शिव की आराधना और उनकी महिमा का श्रवण करने का पावन अवसर है। इसी क्रम में समन्वय श्री पारदेश्वर पीठम् में पूरे श्रावण मास चल रहे वनखंडी पारदेश्वर महादेव के पूजन एवं अभिषेक कार्यक्रम के अंतर्गत तपोनिधि निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर एवं हरिद्वार स्थित भारत माता मंदिर के ट्रस्टी स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि महाराज का तीन दिवसीय प्रवचन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रतिदिन शाम सात बजे से आयोजित सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर शिव महिमा का श्रवण किया। महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि महाराज ने शिव रहस्य, शिवलिंग के प्राकट्य, शिवोपासना, शिव महिमा और शिव तत्व पर सारगर्भित प्रवचन दिया। उन्होंने ब्रह्मा और विष्णु के संवाद तथा दिव्य स्थाणु पुरुष के रूप में शिवलिंग के प्राकट्य की कथा सुनाते हुए शिवलिंग पूजन के महत्व पर प्रकाश डाला।

भगवान शिव के आशुतोष स्वरूप, उनकी करुणा, क्षमाशीलता और भक्तों के प्रति सहज वात्सल्य का वर्णन करते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं को शिव आराधना के लिए प्रेरित किया। प्रवचन के दौरान उन्होंने कैलाश पर्वत पर शिव के परम भक्त गंधर्वराज पुष्पदंत द्वारा भगवान शिव की स्तुति में रचित शिव महिम्न स्तोत्र का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की महिमा इतनी अनंत है कि यदि स्वयं मां शारदा समुद्र को स्याही और पृथ्वी को कागज बनाकर अनंत काल तक लिखती रहें, तब भी उनकी महिमा का पार नहीं पाया जा सकता।
स्वामी जी ने पार्थिव, स्फटिक, पारद तथा नर्मदा नदी से प्राप्त नार्मद शिवलिंग की महिमा भी बताई। अंतिम दिन शिवपुराण, उपनिषद और शिवगीता के प्रसंगों के माध्यम से शिव तत्व के दार्शनिक एवं आध्यात्मिक पक्ष की व्याख्या की। उन्होंने द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन, पूजन एवं स्मरण की महिमा बताते हुए कहा कि श्रावण में की गई शिव आराधना व्यर्थ नहीं जाती।

उन्होंने रुद्राक्ष धारण करने, पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप और त्रिपुंड धारण करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। कहा कि भगवान शिव की आराधना का अधिकार सभी को समान रूप से प्राप्त है। इस दौरान श्रद्धालु भक्ति और आध्यात्मिक भाव से ओतप्रोत नजर आए।