मुख्यालय संवाददाता@विशाल टंडन…

बारह रबी-उल-अव्वल के मुबारक मौके पर नगर में जुलूसे मोहम्मदी पूरे जोशो-खरोश, शानो-शौकत और अकीदत के साथ निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में बच्चे, नौजवान, बुजुर्ग और सभी वर्गों के लोग शामिल हुए। लोगों ने अपने आका हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्ल० की आमद की खुशी का इजहार करते हुए पूरे उत्साह के साथ जुलूस में शिरकत की।

जुलूस की शुरुआत जामा मस्जिद से जोहर की नमाज के बाद हुई। जामा मस्जिद से निकला जुलूस मेन मार्केट होते हुए नई मस्जिद पहुंचा। यहां पहले से मौजूद बच्चे, नौजवान और अन्य लोग जुलूस में शामिल हुए। इसके बाद जुलूस पन्नूगंज मार्ग से होता हुआ चौक पहुंचा। चौक पर पहुंचने के बाद जुलूस शीतल आइसक्रीम की ओर से नईबस्ती होते हुए पुनः चौक पहुंचा। यहां जुलूस करीब पांच मिनट के लिए सभा में तब्दील हो गया।

इस दौरान नई मस्जिद के पेश इमाम मौलाना खुर्शीद साहब ने लोगों को संबोधित करते हुए देश में अमन-चैन, आपसी भाईचारे, सद्भाव और मोहब्बत का पैगाम दिया। उन्होंने कहा कि समाज में आपसी प्रेम और भाईचारा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है तथा देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए मिल-जुलकर रहना चाहिए।

जुलूस के दौरान पूरब महाल के युवाओं द्वारा तैयार की गई काबा और मदीना की झांकी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। झांकी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। बच्चों और युवाओं ने झांकी को आकर्षक ढंग से सजाने में विशेष उत्साह दिखाया। जुलूस में छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में खासा उत्साह देखने को मिला। लोग नए कपड़े और साफा पहनकर जुलूस में शामिल हुए और पूरे रास्ते नारे लगाते हुए अपने आका की आमद की खुशियां मनाते रहे।

जुलूस में शामिल लोगों के उत्साह और अकीदत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता था कि उमस भरी गर्मी होने व लंबे रास्ते के बावजूद लोग पूरे जोश के साथ जुलूस में चलते रहे। बारह रबी-उल-अव्वल के मौके पर नगर की मस्जिदों और कई घरों को भी आकर्षक ढंग से सजाया गया था। रोशनी और सजावट से सड़कें और गलियां जगमगा रही थीं। जगह-जगह लोगों में पर्व को लेकर उत्साह नजर आया।

सभा के बाद जुलूस चौक से आगे बढ़ते हुए बस स्टैंड और हमीद नगर होते हुए पुनः नई मस्जिद के सामने पहुंचा, जहां जुलूस का समापन किया गया। समापन के अवसर पर दुआ-ख्वानी का आयोजन हुआ। मौलाना खुर्शीद ने मुल्क में अमन, चैन, खुशहाली, भाईचारे और आपसी सद्भाव के लिए विशेष दुआ की।

जुलूस को लेकर प्रशासन और पुलिस की ओर से भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस क्षेत्राधिकारी रणधीर मिश्रा के नेतृत्व में कोतवाली और चौकी पुलिस लगातार क्षेत्र में भ्रमण करती रही। जुलूस के मार्ग पर पुलिसकर्मियों की मौजूदगी रही और यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी गई।

जुलूस में सदर मुश्ताक खान, एम.ए. सिद्दीकी एड, अजहर खान, हिदायत उल्ला खान, एजाज कादरी, नियाज़ सोनभद्री, हाजी नूरुद्दीन खान, मुनीर वारसी, मो मुश्ताक, आलमगीर समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

इसके पूर्व सुबह सादिक यानी भोर के समय भी जुलूसे मोहम्मदी निकाला गया। इसमें भी बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने हिस्सा लिया। पूरे आयोजन के दौरान लोगों में धार्मिक उत्साह के साथ-साथ अमन, मोहब्बत, भाईचारे और देश की एकता का संदेश प्रमुखता से दिखाई दिया।

कुल मिलाकर बारह रबी-उल-अव्वल के अवसर पर निकला जुलूसे मोहम्मदी पूरे नगर में अकीदत और उल्लास का केंद्र बना रहा। जुलूस के माध्यम से लोगों ने पैगंबर-ए-इस्लाम मोहम्मद मुस्तफा सल्ल० की शिक्षाओं को याद करते हुए समाज में प्रेम, शांति, भाईचारा और देश की एकता बनाए रखने का संदेश दिया।
