मुख्यालय संवाददाता@विशाल टंडन…
..अर्नब चक्रवात के असर से किसानों की बढ़ी मुश्किलें, पकी धान की फसल गिरने और दलहन-तिलहन के बीज सड़ने की आशंका

जनपद में 28 अक्टूबर की रात से रुक-रुककर हो रही बारिश ने ठंड बढ़ाने के साथ किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी धान की पकी फसल और कटाई के बाद खुले में रखे अनाज पर नुकसान का खतरा मंडराने लगा है। वहीं, लगातार खराब मौसम के कारण रबी की फसलों की बुवाई पिछड़ने और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष राम बहादुर सिंह ने बताया कि चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से किसानों को कृषि संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 28 अक्टूबर की रात से शुरू हुई बारिश और हवा चलने के कारण धान की पकी फसल खेतों में गिरने लगी है। इससे धान के दाने काले पड़ने और बालियों में नमी के कारण अंकुरण होने की आशंका है। जिन किसानों ने धान की कटाई कर ली है, उनकी खुले में रखी फसल भी बारिश से खराब हो सकती है। नमी बढ़ने से मड़ाई में भी परेशानी आएगी।

उन्होंने कहा कि खेतों में पानी भरने और मिट्टी गीली होने से कंबाइन मशीनों से कटाई करना मुश्किल होगा। धान की कटाई में देरी होने से गेहूं सहित अन्य रबी फसलों की बुवाई प्रभावित होगी। चना, मटर और सरसों की बुवाई कर चुके किसानों को भी नुकसान की आशंका है। जिन खेतों में बीज का अंकुरण नहीं हुआ है, वहां बीज सड़ने की स्थिति में दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है। इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा और बीज की उपलब्धता की समस्या भी खड़ी हो सकती है।

राम बहादुर सिंह ने कहा कि पिछले वर्ष भी चक्रवाती तूफान के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। गेहूं का उत्पादन प्रभावित होने से किसान पहले ही परेशान थे। इस वर्ष फिर बेमौसम बारिश ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन बारिश थमने और खेतों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही हो सकेगा।

उधर, चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के संभावित प्रभाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। मौसम केंद्र लखनऊ के पूर्वानुमान के आधार पर 29 और 30 अक्टूबर को जिले में भारी से बहुत भारी बारिश, मेघगर्जन, वज्रपात और तेज हवाओं की आशंका जताई गई है। जिलाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष ने 27 अक्टूबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की थी।

प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, तेज हवाओं के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और जर्जर भवनों से दूर रहने तथा आकाशीय बिजली के समय खुले मैदानों में नहीं जाने की अपील की है। किसानों को पकी फसल और खुले में रखे कृषि उत्पादों को सुरक्षित रखने तथा खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।

किसी भी आपात स्थिति में जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के नंबर 05444-297645 अथवा हेल्पलाइन 1077 पर सूचना दी जा सकती है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और मौसम संबंधी अधिकृत सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।