मुख्यालय संवाददाता@विशाल टंडन…

राष्ट्रीय संचेतना समिति एवं गुप्तकाशी विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को नगर पालिका परिषद सोनभद्र के सभागार में महर्षि वाल्मीकि जयंती समारोह एवं ‘ऋषि सम्मान’ अलंकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इसमें उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभागाध्यक्ष डॉ. शशांक शुक्ल को साहित्यिक एवं बौद्धिक योगदान के लिए ‘ऋषि सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजा पाठक रहे, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार पं. पारस नाथ मिश्र ने की।

सम्मानित डॉ. शशांक शुक्ल ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण की रचना कर भारतीय साहित्य, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना को अमूल्य धरोहर प्रदान की। संस्कृत के प्रथम महाकाव्य रामायण के रचयिता होने के कारण उन्हें आदिकवि की प्रतिष्ठा प्राप्त है।

मुख्य अतिथि डॉ. राजा पाठक ने कहा कि वाल्मीकि रामायण भारतीय संस्कृति, सत्य, धर्म और मानवीय आदर्शों का शाश्वत महाकाव्य है। उनका जीवन तपस्या, आत्मानुशासन और दृढ़ संकल्प की प्रेरणा देता है। अध्यक्षता कर रहे पं. पारस नाथ मिश्र ने रामायण को नैतिकता, कर्तव्यबोध और आदर्श जीवन का मार्गदर्शक बताया।

कार्यक्रम में पं. आलोक कुमार चतुर्वेदी, जगदीश पंथी, आशुतोष ‘मुन्ना’, अनूप मिश्रा, कौसल्या देवी, अनुपमा वाणी, डॉ. लखन राम जंगली, प्रेम मिश्रा, वीरेंद्र देव पाण्डेय, संजय शुक्ला, मनकामना शुक्ला और राजकुमार जालान सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे। संचालन भोला नाथ मिश्र ने किया।