मुख्यालय संवाददाता@विशाल टंडन…
..विश्व गठिया दिवस पर डॉ. अवनीश कुमार शाह ने दी जागरूकता की सलाह, घुटनों को सुरक्षित रखने की आधुनिक तकनीकों की दी जानकारी

विश्व गठिया दिवस के अवसर पर मेडिकल कालेज सोनभद्र के अस्थि रोग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अवनीश कुमार शाह ने गठिया के प्रति जागरूकता, समय पर पहचान और आधुनिक उपचार के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि गठिया केवल जोड़ों का दर्द नहीं है, बल्कि समय पर उपचार न मिलने पर यह जोड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से मरीज की चलने-फिरने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

डॉ. शाह के मुताबिक, सुबह उठने पर या लंबे समय तक बैठने के बाद जोड़ों में दर्द और जकड़न, सूजन, लालिमा तथा घुटनों को मोड़ने या सीधा करने में परेशानी गठिया के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। ऐसे संकेत मिलने पर चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।

उन्होंने बताया कि वजन नियंत्रित रखना, नियमित हल्का व्यायाम करना, संतुलित आहार लेना और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचना जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। शारीरिक क्षमता के अनुसार साइक्लिंग और स्ट्रेचिंग जैसे व्यायाम भी लाभकारी हो सकते हैं।

घुटनों को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक तकनीकों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि कुछ मरीजों में हाई टिबियल ऑस्टियोटॉमी (एचटीओ) के जरिए घुटने पर पड़ने वाले भार को संतुलित किया जा सकता है। वहीं, घुटने के केवल एक हिस्से में गंभीर क्षति होने पर आंशिक घुटना प्रत्यारोपण (यूकेए) का विकल्प उपलब्ध है। कुछ चुनिंदा स्थितियों में आर्थ्रोस्कोपी भी उपयोगी हो सकती है।

उन्होंने कहा कि पीआरपी जैसी ऑर्थोबायोलॉजिकल तकनीकों पर भी काम हो रहा है, लेकिन इनके लाभ सीमित और स्थिति पर निर्भर हैं। स्टेम सेल उपचार सहित किसी भी तकनीक को कार्टिलेज दोबारा बनाने का सुनिश्चित इलाज नहीं मानना चाहिए।

डॉ. शाह ने कहा कि गठिया के प्रत्येक मरीज के लिए उपचार अलग हो सकता है। इसलिए जांच के बाद विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार इलाज कराना चाहिए, ताकि दर्द कम करने, जोड़ों की कार्यक्षमता बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर घुटना प्रत्यारोपण को टालने या उचित समय पर कराने का निर्णय लिया जा सके।
