मुख्यालय संवाददाता@विशाल टंडन
..गृहिणियों से लेकर मिठाई कारोबारियों तक की बढ़ी चिंता, त्योहारों से पहले दाम बढ़ने का असर

रसोई की जरूरी वस्तुओं में शामिल चीनी के बढ़ते दाम ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। करीब 4 महीने पहले जहां चीनी का भाव लगभग 40 रुपये प्रति किलो था, वहीं अब फुटकर बाजार में यह करीब 65 से 70 रुपये किलो तक पहुंच गया है। बढ़ती कीमत का असर घरेलू बजट के साथ मिठाई कारोबार पर भी पड़ रहा है।

रॉबर्ट्सगंज की अंबेडकर नगर की गृहणी सुनीता का कहना है कि पहले महीने का किराना सामान खरीदते समय बार बार चीनी का भाव पूछने की जरूरत नहीं पड़ती थी। अब चीनी खरीदने से पहले कीमत पूछनी पड़ती है। कुछ भी मीठा बनाने से पहले सोचना पड़ रहा है।

न्यू कॉलोनी की सीमा सोनी ने बताया कि रसोई से जुड़े किसी न किसी सामान के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। चीनी महंगी होने से घरेलू खर्च का बोझ और बढ़ेगा। फुटकर किराना व्यवसायी ओम जैन ने बताया कि थोक भाव बढ़ने के कारण फुटकर कीमत भी बढ़ानी पड़ रही है। इससे कई बार ग्राहकों से नोकझोंक की स्थिति बन जाती है।

थोक व्यापारियों के अनुसार नए 2026-27 सीजन में चीनी का स्टॉक अनुमान से कम रहने की आशंका, गन्ने के रकबे में कमी से मिलों का कोटा घटना और गन्ने का कुछ हिस्सा इथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्जन प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा रक्षाबंधन, नवरात्र और दीपावली जैसे त्योहारों के चलते मांग बढ़ने से भी कीमतों पर दबाव है।

मिठाई कारोबारी जय स्वीट्स के सुनील कुमार ने बताया कि पहले रिफाइंड ऑयल फिर गैस और अब चीनी के दाम बढ़ने से लगातार लागत बढ़ रही है। हर बार मिठाइयों के दाम बढ़ाना मुश्किल है, क्योंकि इसका सीधा असर ग्राहकों और कारोबार पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल कुछ और इंतजार करना होगा। यदि चीनी के दाम नीचे नहीं आते हैं तो मजबूरी में मिठाइयों के दाम बढ़ाने पड़ेंगे।

व्यापारियों को उम्मीद है कि चीनी की आवक पर्याप्त होने और त्योहारों का सीजन समाप्त होने के बाद कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि तब तक महंगी चीनी आम परिवारों की रसोई और मिठाई कारोबार दोनों के लिए चिंता बनी हुई है।


