नीट-यूजी पेपर लीक मामले में तीन आरोपियों ने लाइ डिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने की मांग की है। इससे मामले में नया मोड़ आ गया है। आरोपियों की मांग पर अदालत ने सीबीआई से जवाब मांगा है।
निखिल पाठक, नई दिल्ली
नीट-यूजी पेपर लीक मामले में आरोपियों मांगीलाल, दिनेश और विकास बिवाल की ओर से लाइ डिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने की मांग की गई है। आरोपियों की मांग पर मामले की सुनवाई कर रही राउज एवेन्यू स्थित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सीबीआई से जवाब मांगा है। आरोपियों का कहना है कि वे अपनी बेगुनाही और साफ नीयत साबित करने के लिए स्वेच्छा से यह परीक्षण कराना चाहते हैं।
इन आरोपियों ने दाखिल की अर्जी
मंगलवार को सुनवाई के दौरान अधिवक्ता एपी सिंह ने आरोपी मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल के लिए लाइ डिटेक्टर और ब्रेन मैपिंग टेस्ट कराने की अनुमति मांगते हुए अर्जी दाखिल की। इस पर विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता की अदालत ने सीबीआई को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने अधिवक्ता एपी सिंह से यह भी कहा कि ऐसी अर्जी दाखिल करने का उन्हें कोई विशेष अधिकार नहीं है और पहले इसकी स्वीकार्यता पर विचार किया जाएगा।
क्यों कराना चाहते हैं ये टेस्ट?
आरोपियों ने अदालत में आवेदन देकर कहा कि वे बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से यह टेस्ट कराना चाहते हैं, ताकि अपनी साफ नीयत साबित कर सकें और जांच एजेंसी को निष्पक्ष व पारदर्शी जांच में मदद मिल सके। आरोपियों की ओर से यह भी कहा गया कि यह परीक्षण किसी भी सरकारी मान्यता प्राप्त फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) में कराया जा सकता है और यह पूरी तरह कानून व संवैधानिक प्रावधानों के तहत होना चाहिए।
छह अगस्त को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह चार्जशीट की जांच प्रक्रिया बुधवार शाम तक पूरी करे और छह अगस्त तक सभी आरोपियों को इसकी प्रति उपलब्ध कराए। फिलहाल इस मामले में दायर चार्जशीट पर अदालत का संज्ञान लंबित है।
चार्जशीट की प्रति मांगी
अदालत ने आरोपी दिनेश और विकास की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई भी छह अगस्त तक स्थगित कर दी है, क्योंकि बचाव पक्ष के वकील ने चार्जशीट की प्रति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। साथ ही, सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत की अवधि पूरी होने पर अदालत में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेष जज अजय को दोबारा सौंपी गई सुनवाई
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत में भी बदलाव देखने को मिला। विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता को दोबारा इस मामले की सुनवाई सौंपी गई है। उन्होंने विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बलिगा की जगह ली है, जिन्हें एक अगस्त की दिल्ली हाई कोर्ट की अधिसूचना के बाद एनआईए की विशेष अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है।
करीब 20 हजार पन्नों के हैं दस्तावेज
गौरतलब है कि 29 जुलाई को अदालत ने कहा था कि चार्जशीट के साथ दाखिल दस्तावेजों, गवाहों की सूची और जब्त सामग्री की सूची पूरी तरह संलग्न नहीं है। इस पर सीबीआई ने बताया था कि चार्जशीट और उससे जुड़े दस्तावेज करीब 20 हजार पन्नों के हैं, जिन्हें स्कैन किया जा रहा है, इसलिए समय की जरूरत है ताकि सभी 13 आरोपियों को इसकी प्रति दी जा सके।
चार्जशीट पर विचार के लिए तारीख तय
उस दौरान विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बलिगा की कोर्ट ने सीबीआई को तीन दिन का समय देते हुए तीन अगस्त को चार्जशीट पर विचार के लिए तारीख तय की थी, जिसे अब बढ़ाकर छह अगस्त कर दिया गया है।
13 के खिलाफ चार्जशीट में क्या आरोप?
सीबीआई इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, साक्ष्य नष्ट करने सहित भारतीय न्याय संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम के तहत विभिन्न धाराओं में आरोप लगाए गए हैं। चार्जशीट में 360 गवाह, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्य का उल्लेख किया गया है।






